गणेश चतुर्थी / गणेशोत्सव
विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का पावन जन्मोत्सव एवं १० दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ।

शुभ मुहूर्त एवं पूजा समय
India•४ सितंबर २०२७
भगवान श्री गणेश जी का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था, अतः इसी समय स्थापना व पूजन प्रशस्त है।
प्रमुख पूजा एवं व्रत समय
Classical midday partition (11:00 AM to 01:30 PM approx)
Mithya Dosha avoidance on Bhadrapada Shukla Chaturthi
महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। घर-घर एवं सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा की स्थापना की जाती है, २१ मोदक व दूर्वा अर्पित की जाती है और १० दिनों तक भक्तिभाव से पूजन होता है।
समस्त विघ्नों का नाश, बुद्धि, ज्ञान, ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभता की प्राप्ति।
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा
२१ मोदक, दूर्वा एवं लाल अड़हुल (गुड़हल) का पुष्प अर्पण
प्रातः व सायं आरती एवं अथर्वशीर्ष का पाठ
अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे-बाजे के साथ विसर्जन
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
भगवान श्री गणेश • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ May all sentient beings be joyful. May all be free from illness and distress. May all behold what is auspicious and good. May none suffer. Om Peace, Peace, Peace!