३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

अहोई अष्टमी

अहोई अष्टमी

अहोई अष्टमी वह व्रत है जो माताएँ अपनी संतान की भलाई के लिए कार्तिक कृष्ण अष्टमी को रखती हैं।

मुख्य आराध्य देवदेवी माँ
श्रेणीव्रत और उपवास

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

अहोई अष्टमी वह व्रत है जो माताएँ अपनी संतान की भलाई के लिए कार्तिक कृष्ण अष्टमी को रखती हैं।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

माताएँ दिनभर उपवास रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। व्रत संध्या को तारे देखने के बाद, और कुछ परिवारों में चंद्रमा देखने के बाद खोला जाता है।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    सूर्योदय से उपवास, कई लोग जल के बिना भी।

  2. २चरण २

    अहोई माता का चित्र बनाकर या रखकर व्रत कथा के साथ पूजा।

  3. ३चरण ३

    तारों के दर्शन के बाद व्रत खोलना।

प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

देवी माँ • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

देवी माँ · मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥

भावार्थ

देवी माँ को नमन।

108 जपपवित्र मंत्र

व्रत नियम एवं पारण विधि

✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।