दशहरा: प्रदोष काल में ही क्यों किया जाता है रावण दहन?

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दशहरा: प्रदोष काल में ही क्यों किया जाता है रावण दहन?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशहरा पर रावण दहन प्रदोष काल में ही किया जाता है क्योंकि यह समय नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने और धर्म की जीत का प्रतीक है। इस विशेष मुहूर्त में रावण का पुतला फूंकने से अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व मनाया जाता है और शुभ कार्य सफल होते हैं।

दशहरा पर रावण दहन प्रदोष काल में ही क्यों किया जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यास्त के आसपास का समय प्रदोष काल कहलाता है और इसी मुहूर्त में रावण दहन करने का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस काल में शुरू किया गया शुभ काम हमेशा सफल होता है और दिन व रात के मिलने के समय को प्रदोष काल कहा जाता है।

रावण दहन के लिए सूर्यास्त और प्रदोष काल का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म में प्रदोष काल और गोधूलि बेला को नकारात्मक और आसुरी शक्तियों के प्रभाव को खत्म करने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव काफी बढ़ जाता है। रात के अंधेरे में इन शक्तियों का प्रभाव और न बढ़े, इसलिए रावण का दहन प्रदोष काल में ही कर दिया जाता है ताकि नकारात्मक ऊर्जा हावी न हो सके।

प्रदोष काल

दशहरा के दिन प्रदोष काल में रावण दहन करने का विशेष महत्व है, जो सूर्यास्त के आसपास का समय होता है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के लिए पुतला फूंका जाता है।

प्रदोष काल में कौन से कार्य करने चाहिए?

हिंदू धर्म में प्रदोष काल का विशेष महत्व है और इस दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना बेहद फलदायी माना जाता है।

  • कच्चे दूध, गंगाजल, दही और शहद से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें।
  • शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • मंदिर में शिव प्रतिमा के सामने या घर के मंदिर में देसी घी का दीपक जलाएं।
  • रुद्राक्ष की माला से मंत्र का सच्चे मन से जाप करें।

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