रावण वध से पहले भगवान श्रीराम ने क्यों की थी इस देवी की पूजा?

रावण वध से पहले भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण पर निश्चित विजय प्राप्त करने के लिए देवी अपराजिता की पूजा की थी। दशहरा के दिन इस विशेष अनुष्ठान को करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और हर क्षेत्र में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
रावण वध से पहले भगवान श्रीराम ने किस देवी की पूजा की थी?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण से भीषण युद्ध करने से पूर्व देवी अपराजिता की आराधना की थी। वराह पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि प्रभु श्रीराम ने रण-विजय का आशीर्वाद पाने के लिए मां दुर्गा के ही स्वरूप मानी जाने वाली अपराजिता देवी की पूजा की थी। इसी अनुष्ठान के प्रभाव से उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई थी।
देवी अपराजिता की पूजा क्यों की जाती है?
सनातन धर्म में 'अपराजिता' शब्द का अर्थ है वह शक्ति जो कभी पराजित न हो। विजयादशमी के दिन देवी अपराजिता की पूजा-अर्चना करने से साधक को शत्रुओं पर विजय और पराजय से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पूजा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अपराजिता देवी की पूजा किस समय और कैसे की जाती है?
दशहरा के दिन माता अपराजिता की पूजा-अर्चना के लिए एक निश्चित विधान बताया गया है। इस पूजा को सही विधि से करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है:
- दशहरे के दिन सुबह स्नान करने के पश्चात सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- पूजा के दौरान उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण की ओर मुख करके बैठें।
- एक साफ चौकी पर देवी अपराजिता की मूर्ति या चित्र को विराजमान करें।
- माता को रोली, अक्षत और ताजे पुष्प अर्पित करें।
- इसके पश्चात देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और श्रद्धापूर्वक भोग लगाएं।
- पूजा संपन्न होने के बाद उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशहरा के दिन देवी अपराजिता की पूजा-अर्चना हमेशा अपराह्न काल में करना सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है।
विजयादशमी के दिन अपराजिता पूजन का क्या महत्व है?
विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है और इस दिन अपराजिता पूजन का विशेष महत्व है। यह पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आंतरिक और बाहरी शत्रुओं पर विजय पाने का माध्यम है। इस अनुष्ठान को करने से व्यक्ति के भीतर साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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