महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की परंपरा क्यों है खास?

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महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की परंपरा क्यों है खास?

शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, इस विशेष उपाय से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।

महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की परंपरा का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा अष्टमी के दिन 108 दीपक जलाने से देवी की कृपा से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं और जीवन में सौभाग्य के द्वार खुलते हैं। यह कार्य केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का एक सात्विक माध्यम माना गया है।

108 अंक का आध्यात्मिक और धार्मिक आधार क्या है?

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में 108 की संख्या को पूर्णता, पवित्रता और ईश्वरीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के चरणों में 108 दीपक अर्पित करना देवी की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का साधन है।

108 दीपकों को प्रज्वलित करने से ज्योतिषीय रूप से क्या लाभ मिलता है?

ज्योतिष के दृष्टिकोण से, अष्टमी तिथि पर दीपदान करने से ग्रहजनित नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है और मन में स्थिरता तथा एकाग्रता बढ़ती है। इसे पूर्ण आस्था और नियमपूर्वक करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए दीये जलाने की सही विधि क्या है?

दीपक का प्रकाश अज्ञान, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अंधकार को दूर करने का कार्य करता है। दुर्गा अष्टमी पर 108 दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और पवित्र वातावरण का विस्तार होता है।

पूजा के नियम

पूजा के दौरान भूलकर भी टूटे हुए दीपक का प्रयोग न करें। हमेशा साफ और साबुत दीपक लें, एक दीपक से दूसरा दीपक न जलाएं और ध्यान रखें कि पूजा के दौरान कोई भी दीपक बीच में बुझे नहीं।

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