अष्टमी या नवमी, कब खोलें शारदीय नवरात्र का व्रत? नोट करें सही डेट और पारण विधि

शारदीय नवरात्र व्रत का पारण सही विधि और शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि नौ दिनों के कठिन व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी की सच्चे मन से साधना करने से साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि शारदीय नवरात्र व्रत का पारण कब और कैसे करें।
शारदीय नवरात्र का व्रत अष्टमी को खोलें या नवमी को?
नवरात्र व्रत का पारण करने की परंपरा अलग-अलग परिवारों व मान्यताओं के अनुसार भिन्न होती है। जो लोग महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे इस अनुष्ठान के बाद व्रत खोल सकते हैं। वहीं, जो लोग महानवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे नवमी के समापन पर विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।
व्रत पारण का सही समय और नियम क्या हैं?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और 20 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। पारण के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद माता की पूजा और कन्या पूजन का विधान है। इसके बाद प्रसाद और चरणामृत ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है।
शुभ मुहूर्त एवं तिथियां
अष्टमी तिथि प्रारंभ 18 अक्टूबर को सुबह 08 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। वहीं नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी।
शारदीय नवरात्र व्रत पारण की विधि क्या है?
विधिपूर्वक व्रत का समापन करने से देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है:
- पारण वाले दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर की साफ-सफाई करके दीपक प्रज्वलित करें।
- मां दुर्गा की विधिवत धूप, दीप, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित कर पूजा करें।
- देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- माता रानी को हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक भोग लगाएं।
- कन्या पूजन करें, भोजन कराएं, दक्षिणा दें और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
- अंत में माता रानी के चरणों में अर्पित प्रसाद और चरणामृत ग्रहण करके व्रत खोलें।
नवरात्र व्रत का पारण हमेशा सही विधि और शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, तभी नौ दिनों के कठिन व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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