शरद पूर्णिमा की रात जागरण करना क्यों माना जाता है शुभ?

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शरद पूर्णिमा की रात जागरण करना क्यों माना जाता है शुभ?

शरद पूर्णिमा की रात जागरण करने का विशेष धार्मिक महत्व है क्योंकि इस रात्रि मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। आश्विन माह के अंत में आने वाली इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, जिस दौरान चंद्रमा अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।

शरद पूर्णिमा की रात को जागरण क्यों किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है। ऐसे में जो भक्त रातभर जागकर देवी का जागरण करते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी धन और वैभव का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस रात जागने से साधक को जीवन में कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।

कोजागरी पूर्णिमा का क्या अर्थ है और यह क्यों मनाई जाती है?

कोजागरी पूर्णिमा का संबंध 'को जागर्ति' यानी 'कौन जाग रहा है' की पौराणिक परंपरा से है। इस पावन अवसर पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से साधक को जीवन में धन की प्राप्ति होती है और सुख-शांति बनी रहती है। इस तिथि पर देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के अनुष्ठान करने का विधान बताया गया है।

इस पूर्णिमा को चंद्रमा की 16 कलाओं का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, केवल शरद पूर्णिमा की रात को ही चंद्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस विशेष रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इस अमृत वर्षा के समय जागरण करने से साधक का मन शांत रहता है और मानसिक तनाव की समस्या दूर होती है साथ ही सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

शरद पूर्णिमा और भगवान श्रीकृष्ण के महारास का क्या संबंध है?

भागवत पुराण में इस बात का वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात को ही वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसी आध्यात्मिक प्रसंग के कारण शरद पूर्णिमा की रात को भजन-कीर्तन और जागरण करना अत्यंत फलदायी साबित होता है।

कब है शरद पूर्णिमा और इसका सही समय क्या है?

वैदिक पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इसके लिए निर्धारित तिथियां और समय इस प्रकार हैं:

  • पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर
  • पूर्णिमा तिथि का समापन: 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर
  • पर्व की तिथि: 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों और अमृत वर्षा का लाभ उठाने के लिए जागरण के साथ ही नियमों का पालन करते हुए पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करना चाहिए।

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