पापांकुशा एकादशी का क्या महत्व है?

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर, गुरूवार को है, जिसका व्रत करने से कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत काशी-गंगा स्नान से भी अधिक पुण्यकारी माना गया है, और इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा का विशेष विधान है।
पापांकुशा एकादशी का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत स्वर्ग, मोक्ष, आरोग्य, सुंदर पत्नी तथा अन्न और धन प्रदान करने वाला माना गया है। इस एकादशी के व्रत के समान गंगा, गया, काशी, कुरुक्षेत्र और पुष्कर का पुण्य भी नहीं बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के कई जन्मों के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस व्रत की पूजा विधि और नियम क्या हैं?
इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की विधि-विधान से आराधना की जाती है। एकादशी तिथि पर व्रत रखने वाले को मन, वचन और कर्म से सात्विकता बनाए रखनी चाहिए। हरिवासर में एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करने से मनुष्य सहज ही भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त करता है।
पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा क्या है?
पापांकुशा एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक अत्यंत क्रूर बहेलिया रहता था, जिसका पूरा जीवन हिंसा और बुरे कर्मों में बीता था। अंतिम समय में भयभीत होकर वह महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुंचा, जहां महर्षि ने उसे आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
इस एकादशी पर किन चीजों का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है?
पापांकुशा एकादशी के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है, जो व्यक्ति को यमराज के लोक में जाने से बचाता है। इस दिन सामर्थ्य अनुसार निम्नलिखित चीजों का दान करना अत्यंत उत्तम माना गया है:
- सोना
- तिल
- भूमि
- गाय
- अन्न
- जल
- छाता
- जूते
क्या इस व्रत से पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत न केवल करने वाले का उद्धार करता है, बल्कि उसकी कई पीढ़ियों को भी तार देता है। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति मातृ पक्ष की दस पीढ़ियों, पितृ पक्ष की दस पीढ़ियों, स्त्री पक्ष की दस पीढ़ियों और मित्र पक्ष की दस पीढ़ियों का उद्धार करता है। मान्यता है कि ऐसे व्यक्ति दिव्य शरीर धारण कर चतुर्भुज रूप में विष्णुलोक को जाते हैं।
व्रत की तिथि
इस साल पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरूवार को रखा जाएगा। इस दिन विधि-विधान से पूजा और दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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