महाअष्टमी पर पुष्पांजलि कब और कैसे करें? जानें विधि और मुहूर्त

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महाअष्टमी पर पुष्पांजलि कब और कैसे करें? जानें विधि और मुहूर्त

शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी पर मां दुर्गा के चरणों में फूल और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा का विशेष महत्व है, जिसे पुष्पांजलि कहा जाता है। साल 2026 में महाअष्टमी 19 अक्टूबर को है और इस दिन सुबह 6:30 बजे से 10:45 बजे तक का समय पुष्पांजलि के लिए सबसे अच्छा माना गया है।

महाअष्टमी पर पुष्पांजलि कब दी जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाअष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद मां दुर्गा की पूजा के दौरान पुष्पांजलि अर्पित की जाती है। 19 अक्टूबर 2026 को महाअष्टमी के अवसर पर भक्त सुबह के समय निर्धारित मुहूर्तों में देवी को फूल चढ़ा सकते हैं। सुबह की पुष्पांजलि मुख्य रूप से संधि पूजा से पहले पूरी करने की सलाह दी जाती है ताकि सभी अनुष्ठान समय पर संपन्न हो सकें।

महाअष्टमी की पुष्पांजलि का सही समय और शुभ मुहूर्त क्या है?

महाअष्टमी के दिन पूजा और पुष्प अर्पण के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पंचांग और परंपरा के अनुसार मिलने वाले प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • अमृत मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक।
  • पुष्पांजलि का सामान्य समय: सुबह 6 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक।
  • अन्य शुभ मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक।

महाअष्टमी पर 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:30 बजे से 10:45 बजे तक का समय पुष्पांजलि के लिए अत्यंत शुभ है।

पुष्पांजलि अर्पित करने की सरल विधि क्या है?

महाअष्टमी के दिन विधि-विधान से मां दुर्गा को फूल अर्पित करने के लिए इन चरणों का पालन करें:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा के सामने दीपक प्रज्वलित करें।
  3. एक थाली में ताजे फूल, बेलपत्र और अक्षत व्यवस्थित करें।
  4. पुरोहित के मंत्रोच्चार के साथ दोनों हाथों में फूल और बेलपत्र लें।
  5. मां दुर्गा का ध्यान करते हुए उनके चरणों में श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित करें।
  6. पुष्पांजलि के पश्चात माता रानी की आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।

दुर्गा पूजा में मंत्र पुष्पांजलि का पाठ कैसे करें?

अष्टमी पूजा के दौरान पुरोहित के मंत्रोच्चार के साथ भक्त दोनों हाथों में पुष्प और बेलपत्र लेकर मां का आह्वान करते हैं। कई परंपराओं में पुष्पांजलि तीन चरणों में दी जाती है, जिसमें प्रत्येक चरण में मंत्रों के साथ देवी को फूल चढ़ाए जाते हैं। भक्तों को मंत्रों का ध्यानपूर्वक अनुसरण करते हुए माता के चरणों में अपनी अंजलि समर्पित करनी चाहिए।

क्या बिना उपवास के पुष्पांजलि दी जा सकती है?

महाअष्टमी पर कई भक्त व्रत रखते हैं और कुछ लोग सुबह स्नान के बाद बिना भोजन किए पूजा में शामिल होते हैं। हालांकि, धार्मिक नियमों के अनुसार उपवास करना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। बिना उपवास के भी श्रद्धा और साफ मन के साथ मां को पुष्पांजलि दी जा सकती है।

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