महाअष्टमी पर सुबह, शाम या रात कब करें हवन? जानें शुभ मुहूर्त और सरल विधि

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महाअष्टमी पर सुबह, शाम या रात कब करें हवन? जानें शुभ मुहूर्त और सरल विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाअष्टमी पर हवन करने का सही समय सुबह या दोपहर का माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करने के पश्चात हवन किया जाता है। कई स्थानों पर हवन के बाद कन्या पूजन करने और फिर व्रत खोलने की परंपरा भी निभाई जाती है।

महाअष्टमी पर सुबह, शाम या रात कब करें हवन?

पंडित मनीष शर्मा के अनुसार, महाअष्टमी पर हवन सुबह या दोपहर के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा संपन्न करने के बाद हवन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सुबह, दोपहर या पूजा के अन्य शुभ समय में हवन कर सकते हैं।

महाअष्टमी हवन का शुभ मुहूर्त 2026 क्या है?

शारदीय नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की पूजा 19 अक्टूबर को है। इस दिन हवन के लिए निम्नलिखित विशेष मुहूर्त बताए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 बजे से 5:30 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 3:38 बजे से रात तक।

ध्यान दें

पंडित मनीष जी के अनुसार 19 अक्टूबर को पूरे दिन में इन तीन में से किसी भी मुहूर्त में हवन किया जा सकता है।

घर पर सरल विधि से हवन करने की प्रक्रिया क्या है?

हवन संपन्न करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  1. सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल तथा हवन कुंड को भली-भांति साफ करें।
  2. मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और उन्हें फूल, अक्षत, फल तथा मिठाई अर्पित करें।
  3. हवन शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि का संकल्प लें।
  4. हवन कुंड में सूखी लकड़ियां और हवन सामग्री व्यवस्थित करके सुरक्षित तरीके से अग्नि प्रज्वलित करें।
  5. सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए आहुतियां दें।

पूजा मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा।

इस मंत्र का जाप करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार हवन सामग्री और घी की आहुति दें।

पूर्णाहुति और आरती कैसे करें?

हवन के अंत में परंपरा के अनुसार पूर्णाहुति दी जाती है। इसके पश्चात मां दुर्गा की आरती करें और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। अनुष्ठान पूरा होने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार कन्या पूजन करें और प्रसाद वितरित करें।

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