महाअष्टमी पर कैसे करें मां महागौरी की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और पौराणिक कथा

नवरात्र की महाअष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है, जिनकी आराधना से जीवन में सुख-शांति आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन भक्त माता रानी को फूल, फल, मिठाई और नारियल अर्पित करते हैं तथा कई घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है।
महागौरी कौन हैं और इनकी पूजा किस दिन की जाती है?
नवरात्र की महाअष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन भक्त माता रानी को फूल, फल, मिठाई और नारियल अर्पित करते हैं। वर्ष 2026 में महाअष्टमी और मां महागौरी की पूजा 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को मनाई जाएगी।
शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में महाअष्टमी और मां महागौरी की पूजा 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को मनाई जाएगी।
मां महागौरी का रंग और उनका वाहन क्या है?
मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सुंदर और तेजस्वी माना जाता है। उनके नाम में ‘महा’ का अर्थ महान और ‘गौरी’ का अर्थ उज्ज्वल या गौर वर्ण से जुड़ा है। मां महागौरी का वर्ण सफेद है और वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं। उनका वाहन वृषभ यानी बैल है। उनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू होता है, जबकि अन्य दो हाथ आशीर्वाद और अभय मुद्रा में माने जाते हैं।
महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि क्या है?
महाअष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल की सफाई करें और चाहें तो गंगाजल छिड़कें। इसके बाद मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें।
- मां महागौरी को सफेद फूल विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं।
- उन्हें फूल, रोली, चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
- इसके बाद फल और मिठाई चढ़ाकर माता रानी का ध्यान करें।
- पूजा के दौरान मां महागौरी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- पूजा के अंत में मां महागौरी की आरती करें।
मां महागौरी का प्रिय मंत्र और ध्यान श्लोक कौन सा है?
पूजा के दौरान मां महागौरी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से माता की कृपा प्राप्त होती है। इन मंत्रों का जाप करते समय मन को शांत रखें और मां दुर्गा का ध्यान करें।
पूजा मंत्र
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
श्वेत वस्त्र धारण करने वाली और श्वेत बैल पर सवार रहने वाली महागौरी महादेव को आनंद देने वाली हैं और हमें शुभ फल प्रदान करें।
मां महागौरी को किस चीज का भोग लगाया जाता है?
मां महागौरी को नारियल और नारियल से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा हलवा, पूरी, काले चने और अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित किए जाते हैं। मां महागौरी को सफेद और सात्विक भोग अतिप्रिय है। इस दिन दूध, चावल और चीनी से बनी सफेद खीर का भोग लगाने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन कैसे किया जाता है?
कई परिवारों में महाअष्टमी पर कन्या पूजन की परंपरा है। इस दौरान कन्याओं को भोजन कराया जाता है और श्रद्धापूर्वक दक्षिणा या उपहार दिए जाते हैं। अष्टमी और कन्या पूजन पर हलवा, पूरी और काले चने का विशेष भोग लगाया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
मां महागौरी से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है?
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तपस्या करने के कारण उनके शरीर पर धूल-मिट्टी जम गई और उनका वर्ण सांवला पड़ गया। माता पार्वती की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और गंगा के पवित्र जल से उनके शरीर को स्वच्छ किया। इसके बाद माता का स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और गौर हो गया, जिसके कारण वे मां महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
| पूजा का समय | अवधि / विवरण |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:52 से 5:40 तक |
| अमृत काल | सुबह 7:28 से 9:16 तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 तक |
| संधि पूजा का समय | सुबह 10:27 से 11:15 तक |
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