दशहरा 2026: अबूझ मुहूर्त और वाहन, सोना-चांदी खरीदारी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयदशमी का पर्व अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दिन बिना पंचांग देखे नए कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, जिसमें वाहन, सोना-चांदी की खरीदारी और नए व्यापार का आरंभ करना बेहद फलदायी होता है।
क्या दशहरा या विजयादशमी के दिन नया वाहन खरीदना शुभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयादशमी के दिन नया वाहन जैसे गाड़ी, कार या बाइक खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति बेहद अनुकूल होती है, जिससे नई खरीदारी का पूरा लाभ मिलता है। वाहन खरीदने के लिए इस पावन तिथि को अत्यंत उत्तम माना गया है।
अबूझ मुहूर्त किसे कहते हैं और दशहरा अबूझ मुहूर्त क्यों माना जाता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दशहरे के दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है क्योंकि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती है। इस पूरे दिन को ही अपने आप में अत्यंत पवित्र और सकारात्मक माना गया है। इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त की चिंता किए नए कार्यों का श्रीगणेश किया जा सकता है।
क्या दशहरे के दिन बिना पंचांग देखे नए व्यापार या कारोबार की शुरुआत की जा सकती है?
दशहरे के दिन बिना पंचांग देखे किसी भी नए व्यापार या कारोबार की शुरुआत की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नया काम शुरू करने से कार्यों में निश्चित रूप से सफलता मिलती है और व्यापार में लगातार वृद्धि होती है। इस समय शुरू किए गए कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है।
विजयादशमी के दिन सोना और चांदी खरीदना क्यों फलदायी माना जाता है?
दशहरे के पावन पर्व पर सोना-चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं की खरीदारी करना अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक माना जाता है। इस अबूझ मुहूर्त में की गई खरीदारी जीवन में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता लेकर आती है।
दशहरा 2026 डेट और रावण दहन का शुभ मुहूर्त क्या है?
वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से होगी और इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर में 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। दशहरा का पर्व 21 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। रावण दहन के लिए विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा और प्रदोष काल 20 अक्टूबर को शाम को 05 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा।
ध्यान दें
दशहरे के दिन विजय मुहूर्त और प्रदोष काल में रावण दहन किया जाता है, और संपूर्ण तिथि को अबूझ मुहूर्त के रूप में नए कार्यों व खरीदारी के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
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