श्रीराम का दशहरा या मां दुर्गा की विजयदशमी? पौराणिक कथाओं से समझें दोनों के बीच का अंतर

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श्रीराम का दशहरा या मां दुर्गा की विजयदशमी? पौराणिक कथाओं से समझें दोनों के बीच का अंतर

अक्सर दशहरा पर्व मनाने का कारण श्री राम की रावण पर विजय को माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसी कई अन्य कथाएं भी हैं जो इस पर्व को विजयदशमी नाम से जोड़ती हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व के पीछे श्रीराम की विजय के अलावा मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध और पांडवों से जुड़ी कथाएं भी शामिल हैं।

दशहरा और विजयादशमी में क्या अंतर है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा और विजयादशमी एक ही तिथि पर मनाए जाने वाले उत्सव के दो पहलू हैं। दशहरा शब्द का अर्थ दस सिरों वाले रावण के अंत से जुड़ा है, जबकि विजयादशमी का संबंध आश्विन शुक्ल दशमी तिथि पर प्राप्त होने वाली विभिन्न विजयों से है। आमतौर पर लोग इसे एक ही घटना मानते हैं, लेकिन इसके अंतर्गत कई अलग-अलग पौराणिक कथाएं समाहित हैं।

मां दुर्गा और महिषासुर वध की पौराणिक कथा क्या है?

पौराणिक कथा के अनुसार, रम्भासुर के पुत्र महिषासुर ने कठिन तपस्या कर ब्रह्माजी से वरदान मांगा था कि उसकी मृत्यु केवल किसी स्त्री के हाथों हो। वरदान पाकर उसने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, जिससे त्रस्त होकर देवताओं ने भगवती महाशक्ति की आराधना की। सभी देवताओं के तेज से प्रकट हुई देवी ने महिषासुर के साथ नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर दिया। इसी विजय की स्मृति में विजयादशमी का पर्व मनाए जाने की मान्यता है।

भगवान राम ने रावण का वध किस तिथि को किया था?

अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला था, जहां लंका के राजा रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। इसके बाद भगवान श्रीराम ने वानर सेना की सहायता से समुद्र पर सेतु बनाया और लंका पर चढ़ाई की। श्रीराम और रावण के बीच कई दिनों तक युद्ध चला और अंत में भगवान श्रीराम ने दशमी तिथि को रावण का वध कर दिया। इसी घटना की स्मृति में कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

पांडवों की विजय और शमी वृक्ष की कथा क्या है?

एक अन्य मान्यता के अनुसार, विजयदशमी के दिन पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। अज्ञातवास समाप्त होने के बाद पांडवों ने शमी के वृक्ष में छिपाकर रखे अपने अस्त्र-शस्त्र दोबारा प्राप्त किए थे। इसके बाद उन्होंने विराट की गायों को ले जा रही कौरव सेना पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी। इसी घटना को विजयादशमी से जोड़कर देखा जाता है और कई स्थानों पर इस दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है।

कुबेर और राजा रघु की कथा का क्या महत्व है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, दशहरे के दिन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं प्रदान की थीं। राजा रघु ने विश्वजीत यज्ञ के बाद अपनी सारी संपत्ति दान कर दी थी, जिसके बाद कौत्स नामक ब्राह्मण को गुरुदक्षिणा देने के लिए उन्होंने कुबेर पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। इससे भयभीत होकर कुबेर ने शमी के वृक्षों पर स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा कर दी। इसी कथा से दशहरे पर एक-दूसरे को शमी के पत्ते 'सोने' के प्रतीक के रूप में देने की परंपरा जुड़ी हुई है।

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