दर्पण विसर्जन क्या है और विजयदशमी पर यह क्यों किया जाता है?

प्रकाशित:
2 मिनट में पढ़ें
दर्पण विसर्जन क्या है और विजयदशमी पर यह क्यों किया जाता है?

विजयदशमी के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से पहले दर्पण विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें शीशे के माध्यम से मां दुर्गा के प्रतिबिंब और चरणों के दर्शन किए जाते हैं। इस रस्म में मां दुर्गा का प्रतिबिंब शीशे में देखकर उनकी उपस्थिति मानी जाती है, जो भक्तों के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व रखती है।

दर्पण विसर्जन क्या है और यह क्यों किया जाता है?

दर्पण विसर्जन दुर्गा पूजा की एक पारंपरिक रस्म है, जो विशेष रूप से बंगाल और आस-पास के क्षेत्रों में निभाई जाती है। विजयदशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से पहले एक दर्पण में देवी की प्रतिमा का प्रतिबिंब उतारा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी प्रक्रिया के माध्यम से माता की प्राण-ऊर्जा को समेटा जाता है।

विजयदशमी पर मां दुर्गा का प्रतिबिंब आईने में क्यों देखा जाता है?

मां दुर्गा का प्रतिबिंब दर्पण में इसलिए देखा जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस तरह आत्मा अमर है और शरीर पीछे छूट जाता है, वैसे ही शीशे में माता का प्रतिबिंब उतारकर उनकी उपस्थिति को सुरक्षित माना जाता है। इस रस्म के बाद ही मूर्ति को सामान्य मानकर विसर्जन के लिए ले जाया जाता है।

दर्पण विसर्जन की रस्म कैसे निभाई जाती है?

इस रस्म को निभाने के लिए विजयदशमी के दिन मूर्ति विसर्जन से ठीक पहले एक विशेष दर्पण का उपयोग किया जाता है। इसके माध्यम से भक्त मां दुर्गा के चरणों के दर्शन करते हैं और आईने को माता की उपस्थिति के रूप में प्रणाम कर उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

दर्पण विसर्जन का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व क्या है?

यह रस्म मां दुर्गा की विदाई को केवल एक साधारण धार्मिक प्रक्रिया न बनाकर एक आध्यात्मिक अनुभव बनाती है। इसके जरिए भक्तों को यह अहसास होता है कि भौतिक रूप से भले ही मूर्ति का विसर्जन हो रहा है, लेकिन मां की शक्ति और उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है।

दर्पण विसर्जन

यह रस्म मुख्य रूप से बंगाल और पूर्वी भारत की पारंपरिक दुर्गा पूजा का एक विशिष्ट अंग है, जिसे मूर्ति विसर्जन से ठीक पहले निभाया जाता है।

यह भी देखें

Share: