शरद पूर्णिमा / कोजागरी
वैदिक पंचांग एवं सनातन परंपरा के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला शरद पूर्णिमा / कोजागरी का पावन पर्व।

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
शरद पूर्णिमा / कोजागरी हिन्दू पंचांग एवं सनातन संस्कृति का एक विशेष और मंगलकारी पर्व है। इस पावन अवसर पर भक्त प्रातःकाल स्नान कर देव-पूजन करते हैं और दीप प्रज्वलित कर मंगल कामना करते हैं। इस दिन धर्मपरायण आचरण, दान-पुण्य, ईश-वंदना और परिजनों के साथ सात्विक प्रसाद का वितरण करने से जीवन में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
शरद पूर्णिमा / कोजागरी का महत्व: १. सनातन संस्कृति: प्राचीन परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। २. आत्मिक ऊर्जा: शुभ विचारों, सात्विकता और ईश-भक्ति का संचार होता है। ३. सामाजिक सौहार्द: दान, परोपकार और प्रेम-भाव से समाज में शांति स्थापित होती है।
पौराणिक कथा एवं प्रसंग
शास्त्रों एवं इतिहास में वर्णित पावन संदर्भ
"सनातन शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक पर्व और तिथि प्रकृति, खगोलीय स्थिति और ईश्वरीय शक्तियों के सामंजस्य का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक किया गया पूजन अक्षत पुण्यफल प्रदान करता है।"
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
ईष्टदेव को ताजे पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
पवित्र स्तोत्रों, चालीसा अथवा वैदिक शांति मंत्रों का पाठ करें।
आरती के उपरांत सभी में प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित करें।
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
समस्त सनातन देवगण एवं परमेश्वर • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
वैदिक शांति मंत्र
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
Om Sarve Bhavantu Sukhinah Sarve Santu Niramayah, Sarve Bhadrani Pashyantu Ma Kashchid Duhkha-Bhag-Bhavet
पारंपरिक भोग एवं नैवेद्य
शुद्ध भक्ति एवं भाव से अर्पित पावन व्यंजन