३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

फाल्गुन अष्टाह्निक प्रारंभ

फाल्गुन अष्टाह्निक प्रारंभ

यह जैन पर्व या उपवास और प्रार्थना का एक काल है।

श्रेणीजैन पर्व

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

यह जैन पर्व या उपवास और प्रार्थना का एक काल है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

जैन पंचांग में पर्युषण, अष्टाह्निका और नवपद ओली जैसे उपवास, प्रार्थना और अध्ययन के काल आते हैं, जिनमें एक दिन से कई दिनों तक के उपवास और क्षमा का अभ्यास होता है।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    जैन परंपरा के नियमों से उपवास और प्रार्थना।

  2. २चरण २

    मंदिर दर्शन और शास्त्र श्रवण।

  3. ३चरण ३

    पर्युषण के अंतिम दिन क्षमायाचना (मिच्छामि दुक्कडम्)।