३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

नवमी श्राद्ध

नवमी श्राद्ध

नवमी श्राद्ध वह दिन है जब इस तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।

मुख्य आराध्य देवपितर (पूर्वज)
श्रेणीश्राद्ध और पितर

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

नवमी श्राद्ध हिंदू पंचांग के श्राद्ध दिनों में आता है, जब परिवार अन्न, जल और प्रार्थना से अपने पूर्वजों को याद करते हैं। यह कर्म पूर्वज की मृत्यु तिथि पर, अपराह्न में किया जाता है। यह दिन पितर (पूर्वज) को समर्पित है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

श्राद्ध वह तरीका है जिससे परिवार पितरों का ऋण चुकाता है। इसे श्रद्धा से और पूर्वजों के नाम लेकर किया जाता है, और माना जाता है कि इससे घर पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    सुबह जल्दी स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. २चरण २

    प्याज़ और लहसुन के बिना सादा सात्त्विक भोजन बनाएँ।

  3. ३चरण ३

    दक्षिण की ओर मुख करके पितरों को तिल मिला जल अर्पित करें।

  4. ४चरण ४

    पिंड और भोजन अर्पित करें और एक भाग ब्राह्मण, गाय, कौए तथा कुत्ते को दें।

  5. ५चरण ५

    ज़रूरतमंदों को भोजन कराएँ और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करके दिन पूरा करें।

प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

पितर (पूर्वज) • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

पितर (पूर्वज) · मंत्र

ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः ॥

भावार्थ

पितर (पूर्वज) को नमन।

108 जपपवित्र मंत्र