श्री कृष्ण जन्माष्टमी
भगवान विष्णु के आठवें पूर्ण अवतार, धर्म के संस्थापक और गीता के उपदेशक योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का पावन जन्मोत्सव।

शुभ मुहूर्त एवं पूजा समय
India•४ सितंबर २०२६
शुभ जयंती योग: निशिता काल के दौरान अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का पावन संयोग।
प्रमुख पूजा एवं व्रत समय
रात्रि का ८वां मुहूर्त जब भगवान श्री कृष्ण प्रकट हुए थे
खगोलीय स्थानीय सौर मध्यरात्रि
अगली सुबह सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है
महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी या श्रीजयंती) सनातन धर्म का सर्वाधिक उल्लासमय और पावन महापर्व है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के इस भूलोक पर अवतरण का उत्सव है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र के पावन संयोग में मध्यरात्रि के निशिता काल में जब भगवान श्रीकृष्ण कारागार में प्रकट हुए, तब संपूर्ण ब्रह्मांड में दिव्य शंखनाद और आनंद की वर्षा हुई। विश्व भर में करोड़ों भक्त इस दिन उपवास रखकर रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और अभिषेक करते हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्व: १. धर्म संस्थापना: जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान होता है, तब-तब भगवान साधुओं की रक्षा और दुष्टों के संहार हेतु अवतरित होते हैं (गीता ४.७-८)। २. निष्काम कर्मयोग: श्रीमद्भगवद्गीता का अमर संदेश कि केवल कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं—यही जीवन का परम सत्य है। ३. प्रेम भक्ति एवं पापमुक्ति: जन्माष्टमी का निष्काम व्रत रखने से जन्म-जन्मांतर के पापों का शमन होता है और हृदय में प्रेम-भक्ति का प्राकट्य होता है।
पौराणिक कथा एवं प्रसंग
शास्त्रों एवं इतिहास में वर्णित पावन संदर्भ
"मथुरा के क्रूर राजा कंस के कारागार में बंदी देवकी-वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में आधी रात को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वसुदेवजी तूफानी यमुना को पार कर बालक कृष्ण को गोकुल में यशोदा-नंदबाबा के घर सुरक्षित पहुंचा आए।"
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेना एवं पूरे दिन निराहार या फलाहार व्रत रखना।
घर के मंदिर को फूलों, झांकियों और बाल गोपाल के सुंदर झूले से सुसज्जित करना।
श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम एवं भागवत कथा का श्रवण एवं पाठ करना।
मध्यरात्रि १२:०० बजे निशिता काल में शंख-घंटियों के साथ लड्डू गोपाल का पंचामृत अभिषेक करना।
माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित करना।
मध्यरात्रि जन्मोत्सव महाआरती कर चरणामृत ग्रहण करना एवं अगले दिन सूर्योदय बाद पारण करना।
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
भगवान श्री कृष्ण (योगेश्वर) • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
महामंत्र (Maha-Mantra)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare, Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare
श्रीकृष्ण गायत्री मंत्र (Krishna Gayatri)
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
Om Devakinandanaya Vidmahe Vasudevaya Dhimahi, Tanno Krishnah Prachodayat
जन्माष्टमी स्तुति (Janmashtami Stuti)
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
Vasudeva-Sutam Devam Kamsa-Chanura-Mardanam, Devaki-Parama-Anandam Krishnam Vande Jagadgurum
कस्तूरी तिलकम (श्रीकृष्ण ध्यान)
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम् । सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिः गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः ॥
Kasturi-Tilakam Lalata-Patale Vakshah-Sthale Kaustubham, Nasagre Nava-Mauktikam Karatale Venum Kare Kankanam
विभिन्न क्षेत्रों में उत्सव
भारत के विभिन्न प्रांतों एवं विदेशों में उत्सव की अनूठी परंपराएं
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर और बांके बिहारी मंदिर में लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं। संपूर्ण ब्रज रासलीला, अखंड संकीर्तन और रजत शंख से पंचामृत अभिषेक से गुंजायमान रहता है।
जन्माष्टमी के अगले दिन गोविंदा टोलियां सड़कों पर मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बंधी माखन-दही की मटकी फोड़ती हैं, जो कान्हा की बाल लीलाओं का सजीव चित्रण है।
द्वारकाधीश मंदिर में स्वर्ण एवं हीरक श्रृंगार दर्शन होते हैं। श्रद्धालु रात भर पारंपरिक गरबा एवं डांडिया रास खेलते हैं।
घरों के प्रवेश द्वार से पूजा घर तक चावल के आटे से बाल कृष्ण के छोटे पदचिह्न बनाए जाते हैं और सीदई, मुरुक्कू तथा मक्खन का भोग लगाया जाता है।
पारंपरिक भोग एवं नैवेद्य
शुद्ध भक्ति एवं भाव से अर्पित पावन व्यंजन
