३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

कालभैरव जयंती

कालभैरव जयंती

कालाष्टमी भगवान काल भैरव का मासिक व्रत है, जो कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है।

मुख्य आराध्य देवभगवान शिव
श्रेणीव्रत और उपवास

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

कालाष्टमी भगवान काल भैरव का मासिक व्रत है, जो कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

काल भैरव भगवान शिव का वह उग्र रूप हैं जो समय के रक्षक हैं। मार्गशीर्ष मास की कालाष्टमी उनके प्राकट्य का दिन, भैरव जयंती है। यह व्रत भय से रक्षा और बाधाओं के निवारण के लिए रखा जाता है।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    सूर्योदय से उपवास और संध्या को काल भैरव की पूजा।

  2. २चरण २

    काले तिल, सरसों के तेल का दीपक और फूल अर्पित करना।

  3. ३चरण ३

    कुत्तों को भोजन कराना, जो भैरव का वाहन हैं।

प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

भगवान शिव • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

भगवान शिव · मंत्र

ॐ नमः शिवाय ॥

भावार्थ

भगवान शिव को नमन।

108 जपपवित्र मंत्र

व्रत नियम एवं पारण विधि

✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।