३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

कजरी तीज

कजरी तीज

तीज वर्षा ऋतु में महिलाओं का पर्व है, जो देवी पार्वती और भगवान शिव के लिए मनाया जाता है।

मुख्य आराध्य देवदेवी माँ
श्रेणीव्रत और उपवास

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

तीज वर्षा ऋतु में महिलाओं का पर्व है, जो देवी पार्वती और भगवान शिव के लिए मनाया जाता है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) शिव और पार्वती के मिलन का उत्सव है; कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को और हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आती है। महिलाएँ अपने पतियों के लिए उपवास रखती हैं, हरे वस्त्र और मेहंदी लगाती हैं और झूले झूलती हैं।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    दिनभर उपवास और शिव-पार्वती की पूजा।

  2. २चरण २

    हरे वस्त्र, चूड़ियाँ और मेहंदी।

  3. ३चरण ३

    बगीचे में गीत और झूले।

प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

देवी माँ • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

देवी माँ · मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥

भावार्थ

देवी माँ को नमन।

108 जपपवित्र मंत्र

व्रत नियम एवं पारण विधि

✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।