महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
हरियाली अमावस्या अमावस्या है, यानी नए चाँद की रात। यह दिन पितरों को तर्पण से याद करने, दान देने और मन को शांत रखने का है। यह दिन पितर (पूर्वज) को समर्पित है।
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
अमावस्या पितरों का दिन है। माना जाता है कि इस दिन किए गए अर्पण पूर्वजों तक पहुँचते हैं और दान विशेष फलदायी होता है।
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
- १चरण १
सुबह जल्दी स्नान करें, संभव हो तो किसी पवित्र नदी में।
- २चरण २
दक्षिण की ओर मुख करके पितरों को तिल मिला जल अर्पित करें।
- ३चरण ३
ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करें।
- ४चरण ४
शाम को दीप जलाएँ और परिवार के लिए प्रार्थना करें।
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
पितर (पूर्वज) • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
१
पितर (पूर्वज) · मंत्र
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः ॥
भावार्थ
पितर (पूर्वज) को नमन।
108 जपपवित्र मंत्र
