महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
गुरुवायुर एकादशी ग्यारहवीं तिथि पर मनाई जाती है, जिसमें अन्न का त्याग और भगवान विष्णु की पूजा होती है। व्रत अगली सुबह पारण के समय खोला जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है।
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
एकादशी को व्रतों का राजा कहा जाता है। यह शरीर और मन को शुद्ध करने तथा भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए रखी जाती है।
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
- १चरण १
सूर्योदय पर संकल्प लें और अन्न व दालों का त्याग करें।
- २चरण २
तुलसी दल और दीप से भगवान विष्णु की पूजा करें।
- ३चरण ३
एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें और रात भजन में बिताएँ।
- ४चरण ४
द्वादशी को पारण के समय में व्रत खोलें।
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
भगवान विष्णु • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
१
भगवान विष्णु · मंत्र
ॐ नमो नारायणाय ॥
भावार्थ
भगवान विष्णु को नमन।
108 जपपवित्र मंत्र
व्रत नियम एवं पारण विधि
✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।
