महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
जन्माष्टमी भगवान कृष्ण का जन्मदिन है, जो कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में मनाया जाता है।
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
कृष्ण का जन्म मथुरा में अपने मामा कंस के कारागार में मध्यरात्रि को हुआ। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि की पूजा के बाद उसे खोलते हैं।
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
- १चरण १
दिन भर उपवास और भजन के साथ रात्रि जागरण।
- २चरण २
मध्यरात्रि जन्म, बाल कृष्ण का अभिषेक और आरती।
- ३चरण ३
झाँकियाँ, बाल कृष्ण का झूला और अगले दिन दही हांडी।
प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र
भगवान कृष्ण • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह
१
भगवान कृष्ण · मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
भावार्थ
भगवान कृष्ण को नमन।
108 जपपवित्र मंत्र
व्रत नियम एवं पारण विधि
✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।
