३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

गौण अपरा एकादशी

गौण अपरा एकादशी

समस्त पापों के समूल नाश, आत्मिक शुद्धि और भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति हेतु समर्पित गौण अपरा एकादशी का पावन व्रत।

मुख्य आराध्य देवभगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव)
श्रेणीव्रतराज (परम वैष्णव व्रत)

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

गौण अपरा एकादशी भगवान श्री हरि विष्णु की परम पावन तिथि है। पद्म पुराण और श्रीमद्भागवत में एकादशी को 'व्रतों का राजा' कहा गया है। इस दिन अन्न और चावल का त्याग कर निराहार या फलाहार व्रत रखा जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प और पंचामृत अर्पित करते हैं और विष्णु सहस्रनाम तथा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करते हुए रात्रि जागरण करते हैं।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

गौण अपरा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व: १. पाप मुक्ति: जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय होकर आत्म-कल्याण होता है। २. इंद्रिय संयम: उपवास और साधना से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित होता है। ३. वैकुंठ गमन: भगवान श्री हरि के परम धाम (वैकुंठ) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पौराणिक कथा एवं प्रसंग

शास्त्रों एवं इतिहास में वर्णित पावन संदर्भ

कथा सार (मुख्य प्रसंग)

“पद्म पुराण में वर्णित है कि सतयुग में जब मुर नामक असुर ने देवताओं को पराजित कर दिया, तब भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य शक्ति कन्या रूप में प्रकट हुईं जिन्होंने मुर का वध किया। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें 'एकादशी' नाम दिया और वरदान दिया कि जो भी इस दिन उपवास रखेगा, वह परम पद को प्राप्त होगा।”

पद्म पुराण में वर्णित है कि सतयुग में जब मुर नामक असुर ने देवताओं को पराजित कर दिया, तब भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य शक्ति कन्या रूप में प्रकट हुईं जिन्होंने मुर का वध किया। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें 'एकादशी' नाम दिया और वरदान दिया कि जो भी इस दिन उपवास रखेगा, वह परम पद को प्राप्त होगा।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    अन्न, चावल, दालें और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।

  2. २चरण २

    प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और श्री हरि का ध्यान करते हुए संकल्प लें।

  3. ३चरण ३

    भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और पीला चंदन अर्पित करें।

  4. ४चरण ४

    विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।

  5. ५चरण ५

    रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें।

  6. ६चरण ६

    द्वादशी तिथि की प्रातःकाल शुभ मुहूर्त (हरिवासर समाप्त होने पर) में पारण करें।

प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण / वासुदेव) • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

द्वादशाक्षर महामंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

भावार्थ: सर्वव्यापी, परम दयालु भगवान वासुदेव को मेरा बारंबार प्रणाम।
२

अष्टाक्षर नारायण मंत्र

ॐ नमो नारायणाय ॥

भावार्थ: सृष्टि के पालनहार भगवान नारायण को मेरा सादर नमन।

पारंपरिक भोग एवं नैवेद्य

शुद्ध भक्ति एवं भाव से अर्पित पावन व्यंजन

🍯तुलसी दल
🍯माखन-मिश्री
🍯पंचामृत
🍯ऋतुफल (केला, सेब, अनार)
🍯कुट्टू व सिंघाड़े के सात्विक व्यंजन

प्रामाणिक शास्त्र एवं संदर्भ

✦पद्म पुराण (उत्तर खंड - एकादशी माहात्म्य)
✦श्रीमद्भागवत महापुराण
✦विष्णु सहस्रनाम
✦श्रीमद्भगवद्गीता

व्रत नियम एवं पारण विधि

✓अन्न, अनाज, चावल, दालें और फलियों का पूर्ण त्याग करें।
✓दूध, फल, साबूदाना और सेंधा नमक ले सकते हैं।
✓द्वादशी के दिन शुभ समय में ही पारण करना अनिवार्य है।