३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

भीष्म पंचक का प्रथम दिन

भीष्म पंचक का प्रथम दिन

भीष्म पंचक देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पाँच दिनों के व्रत हैं।

मुख्य आराध्य देवभगवान विष्णु
श्रेणीव्रत और उपवास

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

भीष्म पंचक देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पाँच दिनों के व्रत हैं।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

यह भीष्म के व्रत की स्मृति में रखा जाता है और कार्तिक के अंतिम पाँच दिनों में भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत पुण्यदायी माना जाता है।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    पाँचों दिन उपवास या दिन में एक बार भोजन का व्रत।

  2. २चरण २

    तुलसी और दीपक से भगवान विष्णु की पूजा।

  3. ३चरण ३

    तर्पण और दान।

प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

भगवान विष्णु • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

भगवान विष्णु · मंत्र

ॐ नमो नारायणाय ॥

भावार्थ

भगवान विष्णु को नमन।

108 जपपवित्र मंत्र

व्रत नियम एवं पारण विधि

✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।