३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

बोल चौथ

बोल चौथ

यह गाय और बछड़े का दिन है, जिस दिन माताएँ अपनी संतान के लिए उपवास रखती हैं।

श्रेणीव्रत और उपवास

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

यह गाय और बछड़े का दिन है, जिस दिन माताएँ अपनी संतान के लिए उपवास रखती हैं।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

गाय और उसके बछड़े की पूजा की जाती है। दिनभर दूध और दूध से बने पदार्थ नहीं खाए जाते। यह गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में मनाया जाता है।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    फूल और अनाज से गाय और बछड़े की पूजा।

  2. २चरण २

    दूध के पदार्थों के बिना एक दिन, और बाजरे से बना भोजन।

  3. ३चरण ३

    व्रत कथा और बच्चों के लिए प्रार्थना।

व्रत नियम एवं पारण विधि

✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।