३ नवंबर•कृष्ण पक्ष नवमी

भाई दूज

भाई दूज

भाई दूज भाई-बहन का पर्व है, जो कार्तिक शुक्ल द्वितीया को दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है।

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महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

भाई दूज भाई-बहन का पर्व है, जो कार्तिक शुक्ल द्वितीया को दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु की प्रार्थना करती है और भाई उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। कथा है कि यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना के घर गए और उसने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। बंगाल में इसे भाई फोंटा, महाराष्ट्र में भाऊबीज और नेपाल में भाई टीका कहते हैं।

प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

  1. १चरण १

    बहन आरती उतारकर तिलक लगाती है और मिठाई देती है।

  2. २चरण २

    भाई उपहार देता है और आशीर्वाद लेता है।

  3. ३चरण ३

    पारिवारिक भोजन, अक्सर भाई बहन के घर जाता है।