महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य
अखुरथ संकष्टहर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। भक्त दिन भर उपवास रखकर शाम को भगवान गणेश की पूजा करते हैं और चंद्रमा दिखने पर व्रत खोलते हैं।
आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य
संकष्टी का अर्थ है "संकट से मुक्ति"। माना जाता है कि यह व्रत बाधाएँ दूर करता है और बुद्धि, शांति तथा सफलता देता है।
प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण
- १चरण १
प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें।
- २चरण २
दूर्वा, मोदक और लाल फूलों से भगवान गणेश की पूजा करें।
- ३चरण ३
शाम को गणेश स्तोत्र या व्रत कथा का पाठ करें।
- ४चरण ४
चंद्रमा के दर्शन करें, उसे अर्घ्य दें और फिर व्रत खोलें।
व्रत नियम एवं पारण विधि
✓सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।
✓कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।
✓पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।
