जैन पच्चक्खान: दैनिक व्रत एवं त्याग समय
चयनित स्थान के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से परिकलित जैन पच्चक्खाण समय।
गुरुवार, ८ अक्टूबर २०२६
वर्तमान पच्चक्खाण
दिन का चतुर्थ प्रहर
२:५८ अपराह्न - ५:५५ अपराह्न
चौथा दिन का प्रहर
दिन का पच्चक्खाण
चार प्रहर और जैन पच्चक्खाण समय
| पच्चक्खाण | समय | प्रकृति |
|---|---|---|
दिन का प्रथम प्रहरदिन पहला दिन का प्रहर | ६:०८ पूर्वाह्न-९:०४ पूर्वाह्न | दिन |
नवकारशीपच्चक्खाण सूर्योदय के 48 मिनट बाद | ६:५६ पूर्वाह्न | पच्चक्खाण |
दिन का द्वितीय प्रहरदिन दूसरा दिन का प्रहर | ९:०४ पूर्वाह्न-१२:०१ अपराह्न | दिन |
पोरसीपच्चक्खाण दूसरे दिन-प्रहर का आरंभ | ९:०४ पूर्वाह्न | पच्चक्खाण |
साढ़ पोरसीपच्चक्खाण सूर्योदय के डेढ़ प्रहर बाद | १०:३३ पूर्वाह्न | पच्चक्खाण |
दिन का तृतीय प्रहरदिन तीसरा दिन का प्रहर | १२:०१ अपराह्न-२:५८ अपराह्न | दिन |
पुरिमड्डपच्चक्खाण तीसरे दिन-प्रहर का आरंभ | १२:०१ अपराह्न | पच्चक्खाण |
दिन का चतुर्थ प्रहरअभीदिन चौथा दिन का प्रहर | २:५८ अपराह्न-५:५५ अपराह्न | दिन |
अवड्डअभीपच्चक्खाण चौथे दिन-प्रहर का आरंभ | २:५८ अपराह्न | पच्चक्खाण |
चोविहारपच्चक्खाण सूर्यास्त से 48 मिनट पूर्व | ५:०७ अपराह्न | पच्चक्खाण |
रात्रि का पच्चक्खाण
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के चार प्रहर
| पच्चक्खाण | समय | प्रकृति |
|---|---|---|
रात्रि का प्रथम प्रहररात पहला रात्रि प्रहर | ५:५५ अपराह्न-८:५८ अपराह्न | रात |
संध्या प्रतिक्रमणपच्चक्खाण सूर्यास्त पर आरंभ | ५:५५ अपराह्न | पच्चक्खाण |
रात्रि का द्वितीय प्रहररात दूसरा रात्रि प्रहर | ८:५८ अपराह्न-१२:०१ पूर्वाह्न | रात |
संथारा पोरसीपच्चक्खाण दूसरे रात्रि-प्रहर का आरंभ | ८:५८ अपराह्न | पच्चक्खाण |
रात्रि का तृतीय प्रहररात तीसरा रात्रि प्रहर | १२:०१ पूर्वाह्न-३:०४ पूर्वाह्न | रात |
निशीथपच्चक्खाण तीसरे रात्रि-प्रहर का आरंभ | १२:०१ पूर्वाह्न | पच्चक्खाण |
रात्रि का चतुर्थ प्रहररात चौथा रात्रि प्रहर | ३:०४ पूर्वाह्न-६:०८ पूर्वाह्न | रात |
प्रातः प्रतिक्रमणपच्चक्खाण चौथे रात्रि-प्रहर का आरंभ | ३:०४ पूर्वाह्न | पच्चक्खाण |
जैन पच्चक्खाण गणना के बारे में
पच्चक्खाण जैन धर्म में एक औपचारिक त्याग या व्रत का संकल्प है।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय चार प्रहरों में विभाजित होता है। प्रत्येक प्रहर दिन की अवधि का चतुर्थांश होता है।
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक का समय भी चार प्रहरों में विभाजित होता है।
नवकारशी सूर्योदय के 48 मिनट बाद होती है। पोरसी दूसरे दिन-प्रहर से शुरू होती है, साढ़-पोरसी डेढ़ प्रहर बाद, पुरिमड्ड तीसरे प्रहर पर और अवड्ड चौथे प्रहर पर होती है।
चोविहार सूर्यास्त से 48 मिनट पूर्व होता है। संध्या प्रतिक्रमण सूर्यास्त पर, संथारा पोरसी दूसरे रात्रि-प्रहर, निशीथ तीसरे रात्रि-प्रहर और प्रातः प्रतिक्रमण चौथे रात्रि-प्रहर पर होता है।
जैन परंपराएं विभिन्न संप्रदायों और संघों में भिन्न हो सकती हैं। धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने गुरु या परंपरा का अनुसरण करें।
