प्रदोष काल में ही क्यों होती है महादेव की पूजा? जानिए महत्व

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प्रदोष काल में ही क्यों होती है महादेव की पूजा? जानिए महत्व

प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में तांडव नृत्य करते हैं। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।

प्रदोष काल किसे कहते हैं और इसका समय क्या होता है?

प्रदोष काल दिन और रात के मिलन का समय होता है, यानी जब दिन ढल रहा होता है और रात की शुरुआत हो रही होती है। सरल शब्दों में कहें तो सूर्यास्त के आसपास के समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है।

प्रदोष काल में ही भगवान शिव की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य यानी तांडव करते हैं। इसलिए इस काल में पूजा करने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

शिव पूजा का समय

शाम 05 बजकर 58 मिनट से रात 08 बजकर 29 मिनट तक

प्रदोष व्रत 2026 की तिथियां और समय क्या है?

वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विवरण नीचे दिया गया है:

  • त्रिदशी तिथि की शुरुआत: 23 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से
  • त्रयोदशी तिथि का समापन: 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?

हर महीने में दो बार विधिपूर्वक प्रदोष व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को सच्चे मन से करने पर साधक को शुभ परिणाम मिलते हैं और महादेव की कृपा से जीवन में शांति बनी रहती है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को ध्यान में रखकर व्रत और उनकी पूजा की जाती है।

शुभाशुभ मुहूर्त में शिव जी की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के भयों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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