शरद पूर्णिमा पर 16 कलाओं से पूर्ण क्यों होता है चंद्रमा?

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शरद पूर्णिमा पर 16 कलाओं से पूर्ण क्यों होता है चंद्रमा?

शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात्रि चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और उसकी सभी सोलह किरणें अपनी पूरी ऊर्जा के साथ प्रवाहित होती हैं। इस विशेष रात को आसमान के नीचे खीर रखने और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण क्यों होता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार पूरे वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा की रात ही चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे करीब रहता है। जिस तरह सूर्य से सात तरह की किरणें निकलती हैं, उसी तरह चंद्रमा से भी 16 अलग-अलग तरह की किरणें निकलती हैं, जिन्हें चंद्रमा की 16 कलाएं कहा जाता है। भगवान श्रीराम को 12 कलाओं से युक्त माना गया है जबकि श्रीकृष्ण को 16 कलाओं का पूर्ण अवतार माना गया है।

चंद्रमा की 16 कलाएं कौन-सी हैं?

चंद्रमा की ये 16 कलाएं उसकी 16 अलग-अलग अवस्थाओं और ऊर्जाओं को दर्शाती हैं। इन सभी सोलह कलाओं के नाम निम्नलिखित हैं:

  • अमृता
  • मनदा (विचार)
  • पुष्प (सौंदर्य)
  • पुष्टि (स्वस्थता)
  • तुष्टि (इच्छापूर्ति)
  • ध्रुति (विद्या)
  • शाशनी (तेज)
  • चंद्रिका (शांति)
  • धरा
  • कांति (कीर्ति)
  • ज्योत्सना (प्रकाश)
  • श्री (धन)
  • प्रीति (प्रेम)
  • अंगदा (स्थायित्व)
  • पूर्ण (पूर्णता अर्थात कर्मशीलता)
  • पूर्णामृत (सुख)

शरद पूर्णिमा की रात को आसमान के नीचे खीर क्यों रखी जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इस रात्रि खुले आसमान के नीचे खीर रखने से चंद्रमा की औषधीय और सकारात्मक किरणें सीधे उस पर पड़ती हैं। अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म में आश्विन माह की शरद पूर्णिमा को वर्ष की सबसे पवित्र और शुभ पूर्णिमा माना जाता है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। इस दिन देवी लक्ष्मी की साधना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं।

शरद पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी और इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

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