अध्याय २५: पिठोरी व्रत
The Pithora vrata of the new moon of Shravana: drawing the things of the world on a wall around Shiva and Parvati, its worship and udyapana, and the promise that what is drawn is obtained.
अध्याय विहंगावलोकन
- अध्याय
- अध्याय २५
- विषय
- पिठोरी व्रत
- स्रोत
- शिव पुराण, स्कंद पुराण (सनत्कुमार संहिता)
- वक्ता
- सूतजी (शौनकादी ऋषींना)
- महिना
- श्रावण मास (पवित्र श्रावण)
अध्याय २५: संपूर्ण पावन कथा
5 परिच्छेदहे सनत्कुमार! अब मैं तुम्हें श्रावण मास की अमावस्या के महात्म्य के बारे में बताता हूँ। इस दिन रखा गया व्रत "पिठोर व्रत" कहलाता है।
सर्वाधिष्ठान होने से घट को "पीठ" कहते हैं। उसमें जो पूजनोपयोगी वस्तु होती हैं उनको "ओर" कहते हैं। इसीलिये इस व्रत का नाम "पिठोर व्रत" पड़ गया।
विधि : दीवार को पहले सफेद या पीले रंग से रंगनी चाहिये। फिर तांबे के रंग से रंगनी चाहिये। अब मध्य भाग में पार्वती और शिवलिंग बनायें। उसके चारों ओर संसार की सभी चीजें बनायें। जैसे रसोई घर, देव मंदिर, शयनागार, खजाना, स्त्रियों के सोने का कमरा, अन्तः प्रसाद, अट्टालिका, पेड़, ईंट, पत्थर, चूना, दरवाजा, चारदीवारी, बकरी, गौ, भैंस, ऊँट, हाथी, घोड़ा, पालकी, रथ सब प्रकार के अनाज, सब तरह के पक्षी, दालें, सब्जियाँ, फल, दीपक, दीवट आदि।
उपरोक्त वस्तुओं को बनाकर षोड्श उपचारों से उनकी पूजा करनी चाहिये। अनेक तरह के गंध, धूप, चन्दन आदि देकर ब्राह्मण, बालक, सौभाग्यवती स्त्रियों को भोजन कराना चाहिये। तथा अम्बिका सहित शिवजी से कहना चाहिये। - हे दयासिन्धु! हे शशिशेखर! आप इस व्रत से सन्तुष्ट होकर मेरे सभी मनोरथ पूरे करें। दस प्रकार पाँच वर्ष तक व्रत करने के पश्चात् उद्यापन करना चाहिये। उद्यापन में शिव मंत्र "ॐ नमः शिवाय" द्वारा घृत तथा विल्वपत्र द्वारा हवन करें। पहले दिन अधिवासन करके ग्रह-हवन करें। एक हजार आठ या एक सौ आठ आहुतियाँ देनी चाहियें। इसके बाद आचार्य का पूजन करके दक्षिणा देनी चाहिए।
यह व्रत समृद्धि दाता है। इसके तुल्य कोई दूसरा व्रत नहीं है। ऐसा व्रत आज तक न हुआ है और न होगा। हे वत्स! मनुष्य जो भी चीजें दीवार पर बनायेगा वे सब चीजें उसे प्राप्त होंगी।