मां दुर्गा को सर्वमंगला क्यों कहा जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा को 'सर्वमंगला' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह समस्त संसार का कल्याण करती हैं और स्वयं सभी मंगलों से युक्त हैं। दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण की नारायणी स्तुति में मां के इस कल्याणकारी स्वरूप का विस्तार से वर्णन मिलता है।
मां दुर्गा को 'सर्वमंगला' क्यों कहा जाता है?
मां दुर्गा को समर्पित यह नाम और इसका प्रसिद्ध श्लोक आदि पराशक्ति के उस स्वरूप को दर्शाता है जो हर प्रकार की अमंगलकारी ऊर्जा का नाश करता है। मार्कण्डेय पुराण के अध्याय 11 के 10वें श्लोक में देवी को समस्त मंगलों को देने वाली और हर अमंगल को दूर करने वाली शक्ति के रूप में पूजा गया है।
पूजा मंत्र
सर्वमंगलमंगलये शिवे सर्वार्थसाधिके | शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ||
हे सबका मंगल करने वाली, सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी, आपको हमारा नमस्कार है।
'सर्वमंगल मांगल्ये' मंत्र का असली अर्थ और महत्व क्या है?
यह महामंत्र एक ही स्वर में देवी के चार प्रमुख नामों और उनके स्वरूपों का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह प्रार्थना और आशीर्वाद दोनों का एक साथ कार्य करता है, जिससे जीवन में दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
- शिवे: यह भगवान शिव की शक्ति और उनकी सौम्य पत्नी माता पार्वती से संबंध को दर्शाता है।
- त्र्यंबके: यह तीन नेत्रों वाली माता का वह स्वरूप है जो भगवान शिव के साथ साझा होता है।
- गौरी: नवरात्र में जिनकी पूजा मां महागौरी के रूप में की जाती है।
- नारायणी: यह भगवान विष्णु यानी नारायण की शक्ति के रूप में देवी के स्वरूप को प्रकट करता है।
दुर्गा सप्तशती में 'सर्वमंगला' नाम का उल्लेख कहाँ मिलता है?
दुर्गा सप्तशती के अध्याय 11 में शुंभ और निशुंभ के वध के बाद यह प्रसंग आता है। असुरों के संहार से प्रसन्न होकर देवराज इंद्र समेत सभी देवताओं ने राहत की सांस ली और देवी की स्तुति की, जिसे 'नारायणी स्तुति' के नाम से जाना जाता है।
शादी, गृह प्रवेश या शुभ कार्यों में सबसे पहले मां दुर्गा का यह नाम क्यों लिया जाता है?
भक्तों का विश्वास है कि नवरात्र या किसी भी नए कार्य के आरंभ से पहले इस मंत्र का जाप करने से जीवन की तमाम बाधाएं दूर होती हैं। यही कारण है कि विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा, परीक्षा या किसी भी मांगलिक अनुष्ठान व दुकान के उद्घाटन से पहले इस कल्याणकारी मंत्र का स्मरण किया जाता है।
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