# सिंदूर खेला क्या है और यह क्यों मनाया जाता है?

> सिंदूर खेला दुर्गा पूजा की एक महत्वपूर्ण रस्म है, जो विजयदशमी पर मां दुर्गा की विदाई के समय निभाई जाती है। इसमें विवाहित महिलाएं मां को सिंदूर अर्पित कर आपस में लगाती हैं, जो सुख, सौभाग्य और एकजुटता का प्रतीक है।

Source: https://www.hinducalendar.today/posts/what-is-sindoor-khela-and-why-is-it-celebrated

प्रकाशित: Tuesday, 20 October 2026

3 मिनट में पढ़ें

सिंदूर खेला दुर्गा पूजा की एक महत्वपूर्ण रस्म है, जो विजयदशमी पर मां दुर्गा की विदाई के समय निभाई जाती है। इसमें विवाहित महिलाएं मां को सिंदूर अर्पित कर आपस में लगाती हैं, जो सुख, सौभाग्य और एकजुटता का प्रतीक है।

## सिंदूर खेला क्या है और यह कैसे मनाया जाता है?

सिंदूर खेला पश्चिम बंगाल में मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा की एक बेहद लोकप्रिय और प्राचीन परंपरा है। इसे दुर्गा पूजा के अंतिम दिन, यानी विजयादशमी पर मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन से ठीक पहले निभाया जाता है। इस पावन अवसर पर महिलाएं पारंपरिक लाल और सफेद साड़ी पहनकर पूजा पंडालों में एकत्रित होती हैं और मां की विदाई की बेला में उत्सव मनाती हैं। इस रस्म के दौरान ढाक की थाप, शंखनाद और उल्लासपूर्ण वातावरण के बीच माता का पूजन किया जाता है।

## विजयादशमी पर मां दुर्गा को सिंदूर क्यों अर्पित किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखा जाता है जो कुछ दिनों के लिए अपने मायके आती हैं और विजयादशमी के दिन ससुराल यानी कैलाश पर्वत वापस लौटती हैं। जिस प्रकार किसी भी बेटी की मायके से विदाई के समय उसे सिंदूर लगाया जाता है, उसी भाव के साथ दुर्गा विसर्जन से ठीक पहले महिलाएं माता को सिंदूर, पान और मिठाई अर्पित करती हैं। इस रस्म को 'देवी वरण' भी कहा जाता है, जिसमें आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान के साथ मां को विदाई दी जाती है।

## सिंदूर खेला की पूजा विधि और नियम क्या हैं?

इस अनुष्ठान में सबसे पहले मां दुर्गा की प्रतिमा के चरणों और माथे पर सिंदूर अर्पित किया जाता है। इसके बाद पंडाल में मौजूद महिलाएं आपस में एक-दूसरे के चेहरे और मांग में सिंदूर लगाती हैं और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देती हैं। यह परंपरा आपसी प्रेम, भाईचारे और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ पूरी की जाती है।

> ध्यान दें

> सिंदूर खेला का यह अनुष्ठान विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से ठीक पहले संपन्न किया जाता है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक लाल-पार सफेद वस्त्र धारण करती हैं।

## सिंदूर खेला आपसी सौहार्द और एकजुटता का प्रतीक कैसे है?

सिंदूर खेला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आपसी सौहार्द, सामाजिक समरसता और स्त्री शक्ति का एक बड़ा उत्सव है। एक-दूसरे को सिंदूर लगाना समाज की महिलाओं के बीच खुशियां बांटने, आपसी रिश्तों को मजबूत करने और एकजुटता का संदेश देता है। यह परंपरा दिखाती है कि कैसे पर्व और त्योहार सभी को एक सूत्र में पिरोकर समाज में प्रेम और सद्भाव को बढ़ाते हैं।

## यह भी देखें

- [महानवमी: तिथि और पूजा](https://www.hinducalendar.today/festivals/maha-navami)
- [दशहरा: तिथि और महत्व](https://www.hinducalendar.today/festivals/dussehra)
- [आज का पंचांग](https://www.hinducalendar.today/dainika-panchang)

## और पढ़ें

- [देवी बरण की परंपरा क्या है और कैसे निभाई जाती है?](https://www.hinducalendar.today/posts/devi-baran-tradition-durga-puja-significance)
- [दशहरा 2026: रावण दहन समय और शस्त्र पूजन मुहूर्त](https://www.hinducalendar.today/posts/dussehra-2026-ravan-dahan-muhurat-shastra-puja)
- [20 अक्टूबर को कब करें दुर्गा विसर्जन? शुभ मुहूर्त और पूजा विधि](https://www.hinducalendar.today/posts/durga-visarjan-date-muhurat-puja-vidhi)
- [महाअष्टमी पर पुष्पांजलि कब और कैसे करें? जानें विधि और मुहूर्त](https://www.hinducalendar.today/posts/mha-ashtami-pushpanjali-muhurat-vidhi)
- [एग्जाम से लेकर जॉब में चाहिए सफलता? इस विजयादशमी आजमाएं अचूक उपाय](https://www.hinducalendar.today/posts/dussehra-vijayadashami-career-success-remedies-2026)
- [श्रीराम का दशहरा या मां दुर्गा की विजयदशमी? पौराणिक कथाओं से समझें दोनों के बीच का अंतर](https://www.hinducalendar.today/posts/difference-between-dussehra-and-vijayadashami-mythology)

Share:

[More daily updates](https://www.hinducalendar.today/)

## Today's Vedic Glance

Oct 20

Tithi: Shukla Navami

Nakshatra: Shravana

Abhijit Muhurat: 11:36 AM – 12:22 PM

Rahu Kaal: 02:52 PM – 04:19 PM

[View Full Daily Panchang →](https://www.hinducalendar.today/dainika-panchang)

Vedic Timings Drik

## Check Shubha Choghadiya & Rahu Kaal

Plan meetings, journeys, and daily undertakings according to auspicious planetary hours.

[Open Choghadiya Table](https://www.hinducalendar.today/muhurat/choghadiya)
