# कोलाबौ क्या है और दुर्गा पूजा में इसकी पूजा क्यों की जाती है?

> पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान कोलाबौ की अनोखी रस्म निभाई जाती है, जिसमें केले के पेड़ को दुल्हन की तरह सजाकर उसकी पूजा की जाती है। इस परंपरा को नवपत्रिका भी कहा जाता है, जो देवी दुर्गा की शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है।

Source: https://www.hinducalendar.today/posts/what-is-kolabou-durga-puja-tradition

प्रकाशित: Sunday, 18 October 2026

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पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान **कोलाबौ** की अनोखी रस्म निभाई जाती है, जिसमें केले के पेड़ को दुल्हन की तरह सजाकर उसकी पूजा की जाती है। इस परंपरा को नवपत्रिका भी कहा जाता है, जो देवी दुर्गा की शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है।

## कोलाबौ (Kola Bou) क्या है और इसे दुर्गा पूजा में क्यों रखा जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार कोलाबौ दुर्गा पूजा की एक अनूठी परंपरा है जिसमें केले के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और इसकी पूजा विधि-विधान से की जाती है। बंगाली भाषा में कोला का अर्थ केला और बौ का मतलब दुल्हन होता है। यह रस्म मुख्य रूप से दुर्गा सप्तमी की सुबह निभाई जाती है और यह दुर्गा पंडाल की एक प्रमुख परंपरा है।

## नवपत्रिका में कौन-से नौ पौधे शामिल होते हैं?

नवपत्रिका का अर्थ नौ पौधों के एक समूह से होता है, जिसमें नौ तरह के पौधे शामिल होते हैं। सभी नौ पत्तों को एक साथ बांधकर पूजा की जाती है।

- केला
- कचू
- हल्दी
- जयंती
- बेल
- अनार
- अशोक
- मानकचू
- धान

## क्या कोलाबौ भगवान गणेश की पत्नी हैं?

कोलाबौ परंपरा में केले के पेड़ के बगल में गणपति की मूर्ति रखकर पूजा की जाती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि केले का पेड़ गणपति की पत्नी के रूप में पूजा जाता है। यह केवल शुभता का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार हर एक पौधे को माता दुर्गा के अलग रूप और शक्ति के रूप में पूजा जाता है।

## कोलाबौ को दुल्हन की तरह क्यों सजाया जाता है?

केले के पौधे को क्रीम या सफेद रंग की बंगाली साड़ी पहनाई जाती है जिससे उसे नवविवाहिता का रूप दिया जाता है। मान्यता है कि नवविवाहित महिला शुभता और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए केले के पौधे को इस प्रकार सजाया जाता है।

> धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोलाबौ की रस्म मुख्य रूप से महासप्तमी की सुबह निभाई जाती है जिसमें नौ पौधों को एक साथ बांधकर माता दुर्गा के शक्ति स्वरूप की आराधना की जाती है।

## नवपत्रिका पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?

यह रस्म पूजा का एक तरीका होने के साथ-साथ सभी को एक साथ इकट्ठा होकर पूजन करने का प्रतीक भी है जो सदियों से दुर्गा पूजा की अनूठी परंपरा को दिखाता आ रहा है। इसमें हर पौधे को माता दुर्गा के अलग रूप में देखकर समृद्धि की कामना की जाती है।

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