# बरगद के पेड़ का भगवान शिव से क्या है कनेक्शन?

> हिंदू धर्म में बरगद यानी वटवृक्ष को बेहद पवित्र माना जाता है, और पद्म पुराण में भगवान शिव के साथ इसके गहरे संबंध का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वटवृक्ष के नीचे भगवान शिव की विशेष पूजा करने से साधक को आध्यात्मिक ज्ञान और…

Source: https://www.hinducalendar.today/posts/banyan-tree-lord-shiva-connection-vatvriksha-significance

प्रकाशित: Saturday, 24 October 2026

2 मिनट में पढ़ें

हिंदू धर्म में बरगद यानी वटवृक्ष को बेहद पवित्र माना जाता है, और पद्म पुराण में भगवान शिव के साथ इसके गहरे संबंध का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वटवृक्ष के नीचे भगवान शिव की विशेष पूजा करने से साधक को आध्यात्मिक ज्ञान और शांति की प्राप्ति होती है।

## बरगद के पेड़ से भगवान शिव का क्या संबंध है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद का पेड़ दीर्घायु, स्थिरता, ज्ञान और अक्षय जीवन का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव के साथ इस वृक्ष का बहुत ही गहरा और विशेष संबंध बताया गया है। पद्म पुराण के उत्तर खंड के अध्याय 115 में इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है, जो इन दोनों के बीच के आध्यात्मिक रिश्ते को दर्शाती है।

## माता पार्वती के श्राप से वटवृक्ष क्यों बने देवता?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती एकांत में थे, तभी देवताओं के कार्य से अग्निदेव ने ब्राह्मण का रूप धारण करके विघ्न डाल दिया था। इस बात से माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गईं और उन्होंने सभी देवताओं को पृथ्वी पर वृक्ष बन जाने का श्राप दे दिया।

इस श्राप के प्रभाव से त्रिदेव अलग-अलग वृक्षों के रूप में प्रकट हुए। कथा के अनुसार भगवान विष्णु पीपल के रूप में, भगवान ब्रह्मा पलाश के रूप में और भगवान शिव वटवृक्ष के रूप में प्रकट हुए। इसी कारण बरगद को भगवान शिव का प्रतीकात्मक स्वरूप मानकर पूजा जाता है।

## वटवृक्ष को अक्षयवट क्यों कहा जाता है?

बरगद का पेड़ अपनी लंबी आयु और विशाल आकार के लिए बहुत प्रसिद्ध है। इसकी शाखाओं से निकलने वाली जड़ें जमीन तक पहुंचकर नए तनों का रूप ले लेती हैं, जिससे यह वृक्ष बहुत विस्तृत हो जाता है और लंबे समय तक जीवित रहता है। इसी विशेषता के कारण वटवृक्ष को अक्षयवट कहा जाता है, क्योंकि भगवान शिव को भी शाश्वत और अनादि माना गया है।

## वटवृक्ष के नीचे भगवान शिव की पूजा क्यों की जाती है?

वटवृक्ष के नीचे भगवान शिव की पूजा करने के पीछे उनका दक्षिणामूर्ति स्वरूप मुख्य रूप से जुड़ा हुआ है। दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का गुरु रूप है, जिसमें वे मौन रहकर ऋषियों को ज्ञान प्रदान करते हैं। इसलिए वटवृक्ष के नीचे भगवान शिव की उपासना करना बेहद शुभ माना जाता है और इससे भक्त को अनंत ज्ञान की प्राप्ति होती है।

## यह भी देखें

- [महाशिवरात्रि](https://www.hinducalendar.today/festivals/maha-shivaratri)
- [आज का पंचांग](https://www.hinducalendar.today/dainika-panchang)

## और पढ़ें

- [शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग क्यों रचाया महारास?](https://www.hinducalendar.today/posts/sharad-purnima-krishna-maharas-gopis-reason)
- [प्रदोष काल में ही क्यों होती है महादेव की पूजा? जानिए महत्व](https://www.hinducalendar.today/posts/why-shiva-worshiped-in-pradosh-kaal)
- [शरद पूर्णिमा 2026: विष्णु-लक्ष्मी पूजा और दीवाली में अंतर](https://www.hinducalendar.today/posts/sharad-purnima-2026-vishnu-lakshmi-puja-and-diwali-difference)
- [शरीर पर चाबुक के वार और होंठों पर देवी के गीत: कौन हैं पोतराज?](https://www.hinducalendar.today/posts/who-are-potraj-and-whip-ritual-tradition)
- [कार्तिक मास 2026: जानिए क्यों श्रीकृष्ण को प्रिय है दामोदर महीना और दीपदान का रहस्य?](https://www.hinducalendar.today/posts/kartik-maas-damodar-month-significance-deepdan-rules)
- [शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है?](https://www.hinducalendar.today/posts/sharad-purnima-significance-and-puja-vidhi)

Share:

[More daily updates](https://www.hinducalendar.today/)

## Today's Vedic Glance

Oct 24

Tithi: Shukla Trayodashi

Nakshatra: Uttara Bhadrapada

Abhijit Muhurat: 11:36 AM – 12:22 PM

Rahu Kaal: 09:07 AM – 10:33 AM

[View Full Daily Panchang →](https://www.hinducalendar.today/dainika-panchang)

Vedic Timings Drik

## Check Shubha Choghadiya & Rahu Kaal

Plan meetings, journeys, and daily undertakings according to auspicious planetary hours.

[Open Choghadiya Table](https://www.hinducalendar.today/muhurat/choghadiya)
