# अध्याय २: श्रावण मासाचे धर्म पालन

> अध्याय २ - श्रावण मासाचे धर्म पालन. Lord Shiva explains the sacred code of conduct and spiritual observances during the holy month of Shravana, including purity, devotion, early bath, worship with Bilva leaves, and control of the senses.

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## अध्याय विहंगावलोकन

अध्याय

अध्याय २

विषय

श्रावण मासाचे धर्म पालन

स्रोत

शिव पुराण, स्कंद पुराण (सनत्कुमार संहिता)

वक्ता

सूतजी (शौनकादी ऋषींना)

महिना

श्रावण मास (पवित्र श्रावण)

## अध्याय २: संपूर्ण पावन कथा

9 परिच्छेद

भगवान शंकर सनत्कुमार जी से बोले, "हे ब्रह्मा पुत्र! आप नम्र हैं। आप श्रद्धालु हैं। समस्त बारह गुणों से युक्त श्रोता हैं। आपने श्रावण मास के बारे में जो पूछा है तथा जो पूछने से रह गया है, वह सब मैं तुम्हें विस्तापूर्वक बताता हूँ। आपके पिता ब्रह्मा बहुत उद्दण्ड थे इसीलिये उन्हें अपना पांचवाँ सिर गंवाना पड़ा। वे मत्सरता को छोड़ मेरी शरण में आये। मैं जो कुछ बताने जा रहा हूँ उसे एकाग्रचित्त होकर सुनो -

श्रावण मास में नियमों का पालन कर व्रत रखकर सायंकाल को चार बजे भोजन करना चाहिए। एक मास तक रुद्राभिषेक करना चाहिए। अपनी प्रिय किसी एक वस्तु का त्याग करे। पुष्प, फल, धान्य, तुलसी की मंजरी युक्त पत्ती और बेल-पत्रों से मेरी लक्ष पूजा करे। कोटिलिंग पूजन करे। ब्राह्मणों को प्रेमपूर्वक भोजन कराये। नियम का पालन करे। मुझे पंचामृत से अभिषेक अति प्रिय है। अतः उसे भी करे। इस मास में किया जानेवाला कृत्य अनन्त फल देनेवाला है। इस मास में भूमि पर शयन करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सत्य बोलना चाहिए। पत्तल में भोजन करे। प्रातः काल स्नान ध्यान करे। इन्द्रियों को वश में रखना चाहिए। एकाग्र मन से प्रतिदिन मेरी पूजा करे। इस महीने में मन्त्रों का पुरश्रवण भी उत्तम सिद्धि देनेवाला है। "गायत्री मन्त्र" और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें। श्री सूक्त का जाप और भी अधिक फलदायक है। ग्रहयज्ञ, कोटिहोम, लक्षहोम तथा अयुत होम करने पर सद्य फलता है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। जो प्राणी इस महीने में एक दिन भी व्रत को छोड़ देता है वह महाप्रलय तक घोर नरक में जाता है। मुझे श्रावण मास से अधिक और कोई भी मास प्रिय नहीं है।

यह मास फलदायक है तथा निष्काम भाव से किये गये कर्म के फलस्वरूप मोक्ष प्रदान करने वाला है। हे सनत्कुमार! इस मास में करने योग्य जो धर्म कहे गये हैं उन्हें ध्यानपूर्वक सुनो। रविवार को सूर्य का व्रत करना चाहिए। सोमवार का दिन मेरी पूजा का दिन है। श्रावण मास के प्रथम सोमवार से प्रारम्भ करके साढ़े तीन मास तक अर्थात् कार्तिक मास की अमावस्या तक होनेवाला सम्पूर्ण कामना का अर्थसिद्धि प्रदाता रोटक नामक व्रत कहलाता है। मंगलवार के दिन मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। बुधवार को बुध का व्रत, बृहस्पतिवार को गुरुदेव का व्रत, शुक्रवार को "जीवन्तिका देवी" का व्रत रखते हैं। शनिवार को हनुमान तथा नृसिंह का व्रत रखा जाता है।

अब मैं तुम्हें तिथियों के अनुसार होनेवाले व्रतों को बताता हूँ। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को "औदुम्बर" नाम का व्रत होता है। शुक्ल पक्ष की तृतीया को "गौरी" का व्रत होता है। श्रावण शुक्ल चतुर्थी को "दूर्वा गणपति" नामक व्रत होता है। इसे विनायक चतुर्थी व्रत या "गणेश चौथ" का व्रत कहते हैं। श्रावण शुक्ल पंचमी को "नाग पूजन" का व्रत रखा जाता है। श्रावण शुक्ल षष्ठी के दिन "सूपोदन" व्रत रखा जाता है। श्रावण शुक्ल सप्तमी को "शीतला देवी" का व्रत रखा जाता है। "अष्टमी और चतुर्दशी" तिथि में देवी का पवित्रारोपण करना चाहिए। श्रावण मास की कृष्ण तथा शुक्ल पक्ष की नवमी को "नक्त व्रत" का विधान है। शुक्ल पक्ष दशमी को "आशा" नामक व्रत किया जाता है। कोई-कोई मनुष्य श्रावण मास की दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) की एकादशी को "आशा व्रत" रखते हैं। श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भगवान विष्णु का "पवित्रारोपण" करना कहा गया है। इसीलिये इस तिथि को भगवान हरि का श्रीधर नाम से अर्चन उत्तम गति प्रदान कराता है। श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को उत्सर्जन, उपाकर्म, सभादीप, रक्षा- बन्धन, श्रावणी कर्म, सर्पबलि तथा हयग्रीव जयन्ती मनाई जाती है। हयग्रीव नामक भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। उपरोक्त सातों व्रत श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाये जाते हैं।

श्रावण कृष्ण चतुर्थी को "संकट चतुर्थी", जिसे आम भाषा में सकंट चौथ कहते हैं, तथा कृष्ण पक्ष की पंचमी को "मानवकल्पादि" व्रत रखा जाता है। श्रावण कृष्ण अष्टमी को भगवान श्री विष्णु ने श्री कृष्ण नाम से सोलह कलाओं से युक्त अवतार लिया था। उस दिन व्रत तथा महोत्सव मनाया जाता है। श्रावण मास की अमावस्या के "पिठोरा व्रत" का विधान है। इस दिन कुशोत्पादन करें और वृषभों का पूजन करें।

श्रावण शुक्ल पक्ष की प्रथमा से लेकर समस्त तिथियों के अलग-अलग देवी-देवता हैं। प्रतिपदा (प्रथमा) के अग्नि, द्वितीया के ब्रह्मा, तृतीया तिथि की गौरी, चतुर्थी तिथि के गणेश, पंचमी तिथि के नाग, षष्ठी तिथि के स्कन्द, सप्तमी तिथि के सूर्य, अष्टमी तिथि के भगवान शिव, नवमी तिथि की दुर्गा, दशमी तिथि के यम, एकादशी तिथि के विश्वदेव स्वामी हैं। द्वादशी तिथि के श्री हरि, त्रयोदशी तिथि के कामदेव, चतुर्दशी तिथि के शिव और पूर्णिमा के स्वामी चन्द्रमा हैं। अमावस्या के स्वामी पितर हैं।

जिस देव की जो तिथि है उस तिथि को उस देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस श्रावण मास में प्रायः अगस्त्य नक्षत्र का उदय होता है। सिंह राशि पर सूर्य के संक्रमण के दिन से बारह अंश चालीस घड़ी बीत जाने पर अगस्त्य नक्षत्र (ऋषि) का उदय होता है। अगस्त्य ऋषि को सात दिन पहले से ही अर्घ्य देना शुरू कर दें।

बारह महीनों में सूर्य भगवान अलग-अलग नाम से प्रज्ज्वलित होते हैं। श्रावण मास में "गर्भास्त" नाम से प्रज्ज्वलित होते हैं। इसीलिये श्रावण मास में भक्तिपूर्वक सूर्य देव का पूजन करना चाहिए। श्रावण मास में साग का त्याग करना चाहिए। भाद्रपद मास में दही, आश्विन मास में दूध और कार्तिक मास में दाल का त्याग करना चाहिये। यदि कोई भक्त यह सम्पूर्ण विधान करने में असमर्थ हो तो उसे सभी मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। हे मुनि श्रेष्ठ! इस श्रावण भास में मनाये जाने वाले व्रत और धर्मों का सविस्तार रूप से वर्णन करना कई सौ वर्षों में भी पूरा नहीं हो सकता।

भक्त जन मेरे या श्री हरि के प्रीत्यर्थ सम्पूर्ण व्रत करें। मेरे और श्री हरि में कोई भेद नहीं है। मेरे भक्त श्री हरि को प्रिय हैं और श्री हरि के भक्त मुझे प्रिय हैं। जो प्राणी इसमें भेदभाव की कल्पना करते हैं या करेंगे वे नरकगामी होते हैं। हे सनत्कुमार! आप श्रावण मास में धर्म पालन करें।"

॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे श्रावणमाहात्म्ये अध्याय २ संपूर्णम् ॥

## श्रावण महिन्यातील इतर मुख्य व्रते आणि सण

[श्रावण महिना (सविस्तर माहिती) →](https://www.hinducalendar.today/mr/panchang/lunar-month/shravana/shravana-month)[शिव सोमवार व्रत कथा →](https://www.hinducalendar.today/mr/vrat-katha/weekdays/somavara/shiva-somavara-vrat-katha)[श्रावण शिवरात्र मुहूर्त →](https://www.hinducalendar.today/mr/festivals/sawan/sawan-shivaratri-date-time)[मंगळागौर व्रत कथा →](https://www.hinducalendar.today/mr/vrat-katha/mangala-gauri/mangala-gauri-vrat-katha)[नागपंचमी पूजा विधी →](https://www.hinducalendar.today/mr/festivals/nag-panchami/nag-panchami-date-time)[रक्षाबंधन मुहूर्त →](https://www.hinducalendar.today/mr/festivals/rakhi/info/rakhi)
