# द्विपुष्कर योग

> द्विपुष्कर योग: हर महीने की तिथियाँ, वार, तथा आपके स्थान पर आरंभ और समाप्ति का समय (जब तक आप चुनें, भारत)।

Source: https://www.hinducalendar.today/hi/yoga/dwipushkar-yoga-date-time

शुभ (मंगलकारी) • योग · तिथि · वार · नक्षत्र

द्विपुष्कर योग तब तक रहता है जब रविवार, मंगलवार या शनिवार को भद्रा तिथि (किसी भी पक्ष की द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी) हो और चंद्रमा मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में हो।

०४

अगली बार

६:४० पूर्वाह्न, ५ दिस॰

आरंभ शनि, ५ दिस॰, ६:४० पूर्वाह्न

समाप्ति शनि, ५ दिस॰, ११:४८ पूर्वाह्न

## २०२६ का मासिक कार्यक्रम

स्थान: भारत · वर्ष: २०२६

२० मंगल

### जनवरी २०२६

आरंभ: १:०६ अपराह्न, २० जन॰

समाप्ति: २:४२ पूर्वाह्न, २१ जन॰

वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: धनिष्ठा

१६ सोम

### मार्च २०२६

आरंभ: ५:५५ पूर्वाह्न, १६ मार्च

समाप्ति: ६:२३ पूर्वाह्न, १६ मार्च

वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: कृष्ण द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: धनिष्ठा

२४ मंगल

### मार्च २०२६

आरंभ: ७:०४ अपराह्न, २४ मार्च

समाप्ति: ६:१४ पूर्वाह्न, २५ मार्च

वार (सूर्योदय से): मंगलवार · तिथि: शुक्ल सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: मृगशिरा

७ रवि

### जून २०२६

आरंभ: २:४१ पूर्वाह्न, ७ जून

समाप्ति: ५:२९ पूर्वाह्न, ७ जून

वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: धनिष्ठा

७ रवि

### जून २०२६

आरंभ: ५:२९ पूर्वाह्न, ७ जून

समाप्ति: ७:५५ पूर्वाह्न, ७ जून

वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: कृष्ण सप्तमी · चंद्र नक्षत्र: धनिष्ठा

९ रवि

### अगस्त २०२६

आरंभ: ११:०५ पूर्वाह्न, ९ अग॰

समाप्ति: २:४३ अपराह्न, ९ अग॰

वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: कृष्ण द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: मृगशिरा

११ रवि

### अक्टूबर २०२६

वर्तमान माह

आरंभ: ९:३१ अपराह्न, ११ अक्टू॰

समाप्ति: १०:३२ अपराह्न, ११ अक्टू॰

वार (सूर्योदय से): रविवार · तिथि: शुक्ल द्वितीया · चंद्र नक्षत्र: चित्रा

५ शनि

### दिसंबर २०२६

आरंभ: ६:४० पूर्वाह्न, ५ दिस॰

समाप्ति: ११:४८ पूर्वाह्न, ५ दिस॰

वार (सूर्योदय से): शनिवार · तिथि: कृष्ण द्वादशी · चंद्र नक्षत्र: चित्रा

## द्विपुष्कर योग क्या है?

द्विपुष्कर योग तब तक रहता है जब रविवार, मंगलवार या शनिवार को भद्रा तिथि (किसी भी पक्ष की द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी) हो और चंद्रमा मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में हो।

- रविवार
- मंगलवार
- शनिवार
- मृगशिरा
- चित्रा
- धनिष्ठा

द्विपुष्कर योग को परंपरागत रूप से ऐसे कार्यों से जोड़ा जाता है जिनका फल दोगुना माना जाता है।

### पारंपरिक महत्व

द्विपुष्कर शब्द इस पारंपरिक विश्वास को दर्शाता है कि इस योग में शुरू किए गए कार्यों का फल दोगुना होता है।

समय आपके चुने हुए स्थान के अनुसार निकाले गए हैं (जब तक आप कोई स्थान न चुनें, भारत के लिए)। अपने स्थान के पूरे दिन के लिए दैनिक पंचांग खोलें।
