# श्राद्ध तिथि कैलकुलेटर

> मृत्यु की तिथि, समय और स्थान से श्राद्ध तिथि, पितृ पक्ष में महालय श्राद्ध का दिन और आने वाले वर्षों के वार्षिक श्राद्ध जानें।

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श्राद्ध

मृत्यु की तिथि, समय और स्थान से उसकी तिथि, पितृ पक्ष में महालय श्राद्ध का दिन, और आने वाले वर्षों के वार्षिक श्राद्ध कुतप, रौहिण और अपराह्न समय सहित जानें।

## श्राद्ध तिथि का शास्त्रोक्त महत्व

हिन्दू धर्म में पितरों की तृप्ति, मोक्ष और आशीर्वाद प्राप्ति हेतु श्राद्ध का विधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस तिथि पर व्यक्ति का देहावसान होता है, प्रतिवर्ष उसी हिन्दू तिथि पर वार्षिक श्राद्ध (बरसी) किया जाता है।

ग्रेगोरियन कैलेंडर में मृत्यु दिवस की तारीख हर साल बदल जाती है क्योंकि हिन्दू पंचांग सूर्य और चन्द्रमा की खगोलीय स्थिति पर निर्भर करता है। यह कैलकुलेटर द्रिक पंचांग के सटीक नियमों पर आधारित है।

## अपराह्न काल में ही श्राद्ध क्यों किया जाता है?

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार दिन के ५ भागों (प्रातः, संगव, मध्याह्न, अपराह्न और सायाह्न) में से चौथा भाग ‘अपराह्न काल’ पितरों को समर्पित है। जिस दिन अपराह्न काल में मृत्यु तिथि उपस्थित हो, उसी दिन श्राद्ध संपन्न किया जाता है।

## कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल मुहूर्त

श्राद्ध, तर्पण एवं ब्राह्मण भोज हेतु निम्नलिखित मुहूर्त शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताए गए हैं:

- **कुतुप मुहूर्त (Kutup):** दिन का आठवां मुहूर्त कुतुप कहलाता है। इस मुहूर्त में श्राद्ध अनुष्ठान का आरंभ अत्यंत शुभ होता है।
- **रौहिण मुहूर्त (Rohina):** दिन का नौवां मुहूर्त रौहिण कहलाता है। यह कुतुप के तुरंत बाद आता है और पितरों की तृप्ति के लिए श्रेष्ठ है।
- **अपराह्न काल (Aparahna):** दिन के ३/५ से ४/५ भाग का समय। मुख्य तर्पण और पिंडदान इसी कालखंड में करना शास्त्रसम्मत है।

## महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम

- **चतुर्दशी श्राद्ध नियम:** चतुर्दशी श्राद्ध केवल दुर्घटना, विष, अस्त्र-शस्त्र अथवा अप्राकृतिक मृत्यु वालों के लिए है। सामान्य मृत्यु वालों का महालय श्राद्ध अमावस्या पर किया जाता है।
- **मातृ नवमी (अविधवा नवमी):** सधवा रहते हुए मृत्यु को प्राप्त माताओं और स्त्रियों का श्राद्ध पितृ पक्ष की नवमी को करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
- **अधिक मास नियम:** अधिक मास में मृत्यु होने पर साधारण वर्षों में शुद्ध (निज) मास में श्राद्ध किया जाता है और अधिक मास आने पर दोनों में किया जाता है।
- **पंचबलि कर्म:** श्राद्ध के दिन गाय (गोबलि), श्वान (श्वानबलि), कौआ (काकबलि), देव और चींटियों को ग्रास देना अनिवार्य है।

## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

वार्षिक श्राद्ध और महालय श्राद्ध में क्या अंतर है?

वार्षिक श्राद्ध हर वर्ष मृत्यु के हिन्दू मास और तिथि पर किया जाता है, जबकि महालय (पितृ पक्ष) श्राद्ध आश्विन कृष्ण पक्ष के १५ दिनों में अपने पितरों की तिथि पर किया जाता है।

यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो क्या करें?

यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या) के दिन श्राद्ध कर्म और तर्पण करना चाहिए।

अपराह्न व्यापिनी तिथि का क्या अर्थ है?

जो तिथि दोपहर के समय अपराह्न काल (लगभग १:१५ से ३:४५) में विद्यमान हो, उसे अपराह्न व्यापिनी तिथि कहते हैं।
