# मूल

> मूल का अर्थ और हिंदू पंचांग में पारंपरिक महत्व जानें। पंचांग की गणना और कैलेंडर में इसके स्थान की जानकारी पढ़ें।

Source: https://www.hinducalendar.today/hi/panchang/nakshatra/mula

२७ नक्षत्र मंडल

१९

मूल भचक्र का १९वाँ नक्षत्र है। इसके अधिपति देव निर्ऋति देवी और स्वामी ग्रह केतु हैं।

अधिष्ठाता देवता निर्ऋति देवी

स्वामी ग्रह केतु

प्रकृति तीक्ष्ण / दारुण (गहन व मूल-खोजी)

तत्व अग्नि तत्त्व

प्रतीक मूल गुच्छ (जड़ों का बंध)

शुभ / अनुकूल

- तांत्रिक कर्म और काला जादू आरंभ करना
- पशुओं को प्रशिक्षित करना और पालतू बनाना
- साधना और हठयोग
- विवाह के लिए शुभ माने गए नक्षत्रों में गिना जाता है।

प्रतिकूल

- हानिकारक मानकर विवाह के लिए इसका पहला चरण छोड़ दिया जाता है।
- गृह प्रवेश के लिए शुभ माने गए नक्षत्रों में नहीं है।
