# संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और महत्व

> संकष्टी चतुर्थी 2026: हिंदू पंचांग में तिथियाँ, समय और पारंपरिक महत्व जानें। त्योहार के व्रत, पूजा और अनुष्ठानों की जानकारी देखें।

Source: https://www.hinducalendar.today/hi/festivals/sankashti-chaturthi

## महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

संकष्टी चतुर्थी (संकटहरा चतुर्थी) प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह पावन व्रत प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु दिन भर उपवास रखकर जीवन के समस्त कष्टों और विघ्नों के निवारण हेतु प्रार्थना करते हैं। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रदेव को अर्घ्य देने का विशेष विधान है। रात्रि में चंद्रोदय होने पर जल, कच्चा दूध और अक्षत से अर्घ्य देकर गणेश जी की आरती के उपरांत पारण किया जाता है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

जीवन के समस्त संकटों का नाश, आर्थिक व मानसिक बाधाओं का निवारण, बुद्धि, विद्या और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति।

## पौराणिक कथा एवं प्रसंग

शास्त्रों एवं इतिहास में वर्णित पावन संदर्भ

कथा सार (मुख्य प्रसंग)

“गणेश पुराण के अनुसार जब राजा हरिश्चंद्र और नल-दमयंती घोर संकट में थे, तब उन्होंने संकष्टी चतुर्थी व्रत का पालन कर अपना खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त किया था।”

गणेश पुराण एवं मुद्गल पुराण में संकष्टी चतुर्थी की महिमा का विस्तार से वर्णन है। प्राचीन काल में जब राजा दशरथ और भगवान राम के पूर्वजों ने जीवन की कठिन परिस्थितियों में भगवान गणेश का यह व्रत किया था, तब उनके समस्त अमंगल दूर हो गए थे। जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक २१ दूर्वा दल अर्पित कर चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलता है, उसके सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।

[पूरी कथा पढ़ें](https://www.hinducalendar.today/hi/vrat-katha/sankashti/sankashti-chaturthi-vrat-katha)

## प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

1. १ चरण १ सूर्योदय से उपवास का संकल्प धारण करना
2. २ चरण २ भगवान गणेश को २१ दूर्वा दल, लाल सिंदूर और मोदक अर्पित करना
3. ३ चरण ३ श्री गणपति अथर्वशीर्ष और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ
4. ४ चरण ४ सायंकाल स्थानीय चंद्रोदय के समय की प्रतीक्षा करना
5. ५ चरण ५ चंद्रदेव को जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य देना
6. ६ चरण ६ मोदक और सात्विक प्रसाद से व्रत का पारण करना

## प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

भगवान श्री गणेश (संकटमोचन गणपति) • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

#### श्री गणेश महामंत्र

ॐ गं गणपतये नमः ॥

भावार्थ: विघ्नहर्ता और समस्त सिद्धियों के दाता भगवान श्री गणेश को मेरा प्रणाम।

२

#### संकटनाशन गणेश स्तोत्र

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये ॥

भावार्थ: माता गौरी के पुत्र श्री विनायक को मस्तक झुकाकर प्रणाम करते हुए दीर्घायु और समस्त कामनाओं की सिद्धि हेतु उनका नित्य स्मरण करें।

[और मंत्र](https://www.hinducalendar.today/hi/vedic-mantra/gods/lord-ganesha/ganesha-mantras)

## पारंपरिक भोग एवं नैवेद्य

शुद्ध भक्ति एवं भाव से अर्पित पावन व्यंजन

🍯 मोदक (उकड़ी व तले हुए)

🍯 तिल के लड्डू

🍯 २१ दूर्वा दल

🍯 ताजा नारियल और केला

🍯 पंचामृत

## प्रामाणिक शास्त्र एवं संदर्भ

✦ गणेश पुराण (उपासना खंड)

✦ मुद्गल पुराण

✦ श्री गणपति अथर्वशीर्ष (अथर्ववेद)

## व्रत नियम एवं पारण विधि

✓ दिन भर उपवास रखें; आवश्यकता होने पर फलाहार (दूध, फल, साबूदाना, सेंधा नमक) ले सकते हैं।

✓ अन्न, अनाज और तामसिक भोजन वर्जित हैं।

✓ रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर ही पारण करें।
