# रवि प्रदोष व्रत 2026: तिथि और महत्व

> रवि प्रदोष व्रत 2026: हिंदू पंचांग में तिथियाँ, समय और पारंपरिक महत्व जानें। त्योहार के व्रत, पूजा और अनुष्ठानों की जानकारी देखें।

Source: https://www.hinducalendar.today/hi/festivals/ravi-pradosh-vrat

## महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

महत्व एवं आध्यात्मिक रहस्य

रवि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, और पूजा प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त के बाद की संध्या में होती है, जब भगवान शिव सबसे प्रसन्न माने जाते हैं। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है।

आध्यात्मिक महत्व, दार्शनिक भाव एवं सनातन मूल्य

माना जाता है कि प्रदोष पूजा भक्त को पापों से मुक्त करती है और परिवार में शांति व समृद्धि लाती है।

## प्रमुख विधि एवं अनुष्ठान

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि एवं आचरण

1. १ चरण १ प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें।
2. २ चरण २ प्रदोष काल में शिवलिंग का जल, दूध और शहद से अभिषेक करें।
3. ३ चरण ३ बिल्व पत्र, सफेद फूल और धूप अर्पित करें।
4. ४ चरण ४ शिव मंत्र और व्रत कथा का पाठ करें, फिर व्रत खोलें।

## प्रधान देवता एवं पवित्र मंत्र

भगवान शिव • कल्याणकारी वैदिक एवं पौराणिक मंत्र संग्रह

१

#### भगवान शिव · मंत्र

ॐ नमः शिवाय ॥

भावार्थ

भगवान शिव को नमन।

108 जप पवित्र मंत्र

[और मंत्र](https://www.hinducalendar.today/hi/vedic-mantra/gods/lord-shiva/shiva-mantras)

## व्रत नियम एवं पारण विधि

✓ सूर्योदय से व्रत रखें; कठोर व्रत न हो तो जल, फल या दूध लिया जा सकता है।

✓ कठोर व्रत में अन्न, प्याज़, लहसुन और नमक से बचें।

✓ पूजा के बाद व्रत के निर्देशित समय पर उपवास खोलें।
